आनन्द राय, लखनऊ। कालिदास मार्ग का नजारा और दिनों की अपेक्षा कुछ अलग ही था। मुख्यमंत्री के पांच नंबर के बंगले के सामने रौनक बनी रहती है लेकिन रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह का चार नंबर का बंगला सुबह से ही गुलजार था। यहां 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का टिकट चाहने वाले राजनाथ को चेहरा दिखाने की होड़ में लगे थे। आश्र्वासन देकर राजनाथ ने भी उनके सियासी सपनों को पंख लगा दिए।

भाजपा की सियासत में राजनाथ सिंह की अहमियत और हैसियत छिपी नहीं है। इसीलिए टिकट चाहने वाले उनसे मिलकर "आशीर्वाद" लेने को आतुर थे। बंगले के स्वागत कक्ष, लॉन और प्रतीक्षा कक्ष में भरे लोग अपनी बात कहना चाह रहे थे। राजनाथ ने किसी को नाउम्मीद नहीं किया।

ज्यादातर लोगों को उन्होंने मेहनत का मंत्र दिया। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही, पूर्व मंत्री धर्मपाल सिंह, राजेन्द्र सिंह उर्फ मोती सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता भी उनसे मिलने आए। इनकी हाजिरी के भी निहितार्थ निकाले गये। सिर्फ सियासी लोग ही उनके इर्द-गिर्द नहीं थे। सीएमएस के जगदीश गांधी, मनीषा मंदिर की सरोजनी अग्रवाल और राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के प्रोफेसर शिशिर पाण्डेय जैसे लोग भी व्यक्तिगत संबंधों के चलते मिलने आये थे।

बांदा से जिला पंचायत सदस्य गीता सागर वर्मा नरैनी सुरक्षित सीट पर टिकट मांग रही हैं जबकि 1993 में आगरा के बाह से लड़ चुके पूर्व दस्यु तहसीलदार सिंह के पौत्र भावेश सिंह राठौर एक बार फिर किस्मत आजमाना चाहते हैं। बस्ती के हरैया के अनिल सिंह को देखते ही राजनाथ ने कुशलक्षेम पूछी। पूर्व मंत्री श्रीराम सोनकर मोहम्मदाबाद से और मऊ से राकेश सिंह टिकट पा कराने आए थे।

बहराइच के पूर्व विधायक सुरेश्र्वर सिंह, बलिया के पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह, कासगंज के पटियाली से यशवीर सिंह, सीतापुर के महोली से रीति सिंह, पूर्व एमएलसी अवध कुमार सिंह बागी, चंदौली की दर्शना सिंह, हरदोई के अशोक सिंह जैसे लोग अपनी चाह प्रकट करने में जुटे थे। वह सबकी सुन रहे थे।

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