
विशाल श्रेष्ठ, कोलकाता। लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग 19 अप्रैल को होगी। राज्य की 42 लोकसभा सीटों के लिए कुल सात चरणों में मतदान होगा। बंगाल में इस बार लोकसभा चुनाव के समय 'बाहरी' का मुद्दा एक बड़ा सवाल बन सकता है। वर्ष 2021 में यहां विधानसभा चुनाव के समय यही मुद्दा चलन में था। तब यह हुआ था कि राज्य में सीएम ममता बनर्जी सहित टीएमसी के नेताओं ने चुनावी प्रचार करने आए अन्य प्रदेशों के राजनीतिक विरोधी दलों के नेताओं को बाहरी करार दिया था। खास तौर पर भाजपा के नेता। इतना ही नहीं, टीएमसी की तरफ से पीएम मोदी के लिए भी इसी तरह की बातें की गईं थीं। ममता बनर्जी ने इनको बसंत की कोयल करार दिया था और कहा था कि ये लोग केवल चुनावी मौसम में ही बंगाल आते हैं। अब चूंकि 10 मार्च को टीएमसी ने लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी घेाषित कर दिए हैं तो उस पर भी बाहरी लोगों को टिकट दिए जाने पर बात कही जाने लगी है।
तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने बहरमपुर से पूर्व क्रिकेटर युसुफ पठान, बर्धमान दुर्गापुर से अन्य पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आज़ाद व आसनसोल से अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को टिकट दिया है। यहां बता दें कि युसुफ स्वयं बाहरी राज्य गुजरात से व शत्रुघ्न बिहार से हैं।
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टीएमसी की सूची सामने आने के बाद बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा था कि सीएम की पार्टी भी अब बाहरी लोगों को यहां ला रही है। बीजेपी आईटी सेल के अमित मालवीय ने कहा था कि टीएमसी की लिस्ट में ऐसे प्रत्याशी हैं जिन्हें सीएम खुद बाहरी बताती हैं। इस मामले में वाममोर्चा का कहना है कि अन्य प्रदेशों से संबंध रखने वाले टीएमसी ने पवन सिंह की उम्मीदवारी पर प्रश्न खड़े किए थे। अब बाहरी लोगों को बंगाल में उम्मीदवार बनाकर टीएमसी अपने ही नैरेटिव को झुठला रही है।
टीएमसी के राज्यसभा सदस्य सुखेदु शेखर राय कहते हैं कि वीके कृष्ण मेनन और बीआर आंबेडकर भी यहां से चुनाव में खड़े हुए थे। तब तो बंगाल ने उन्हें कभी बाहरी प्रत्याशी नहीं माना। बाहरी वो हैं जो इस राज्य बंगाल का अपमान करते हैं। मालूम हो कि नेहरू की सरकार में रक्षा मंत्री रहे वीके कृष्णा मेनन ने वर्ष 1969 में चांग्ला कांग्रेस के टिकट से बंगाल की मिदनापुर (वर्तमान में मेदिनीपुर) सीट से लोकसभा चुनाव जीता था, जबकि आंबेडकर बंगाल से संविधान सभा के लिए चुन लिए गए थे।
