International Yoga Day 2019: योगासन केवल शरीर को विभिन्न मुद्राओं में कुछ देर के लिए स्थिर रखने का नाम नहीं है। पांचों इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए मन वचन और काया के संपूर्ण सहयोग से होने वाली क्रिया को योगासन कहा जाता है। आइए समझते हैं कैसे और कब करें योगासन।
कथा उपनिषद में योग की व्याख्या इस तरह की गई है कि 'जब पांचों इंद्रियों के साथ मस्तिष्क का योग हो और किसी एक मुद्रा में स्थिर हों तथा बुद्धि सक्रिय न हो तो उसे योगमुद्रा की सर्वोच्च स्थिति माना जाता है।' आसन अष्टांग
योग का तीसरा व हठयोग का पहला अंग है। शरीर की वह अवस्था जिसमें सुखपूर्वक स्थिरता के साथ रहा जा सकता है,उसे आसन कहा जाता है।
कब करें आसन
1. प्रातःकाल ब्रह्ममुहुर्त में उठकर मल-मूत्र का त्याग करते हुए आसनों का शुभारंभ करना चाहिए। जिस तरह मुंह में अंगुली डालकर सुबह कुल्ला किया जाता है, ठीक उसी तरह मल त्याग करने के बाद गुदा में अंगुली डालकर उसे पूर्णतः स्वच्छ कर लेना चाहिए। इसे 'गणेश क्रिया' कहा जाता है। मल के अंश यदि आंतों में चिपके रहेंगे तो स्वास्थ पर उसका विपरीत असर पड़ता है। विषैले तत्व शरीर में ही रह जाते हैं।
2. पैरों के बल उकड़ु बैठकर भरपेट पानी पीना चाहिए।
3. आसनों के समय ढीले एवं सूती वस्त्र ही पहनने चाहिए।
4. रक्त शुद्धि एवं नाड़ी शुद्धि की ओर भी ध्यान देना चाहिए।
कहां करें आसन
आसन साफ सुथरी एवं खुले स्थान पर करें। भूमि पर करने की बजाए किसी दरी अथवा चटाई का ही प्रयोग करें। गर्मियों के मौसम में छत पर अथवा बगीचे में घास पर कर सकते हैं। योग साधक का मुंह पूर्व दिशा की ओर
ही होना चाहिए। प्रयास करें कि प्रतिदिन एक ही स्थान पर योगाभ्यास कर सकें।
क्या करें आसनों से पहले
योगाभ्यास आरंभ करने से पहले शरीर को शिथिल करें, लंबी और गहरी सांस लें। हल्के और माइक्रो व्यायाम से
शुरूआत करें ताकि वर्मअप हो सके। वार्मअप करने से शरीर में रक्त का संचार तीव्र गति से होने लगता है। शांत
अवस्था में रक्तचाप भी कम ही रहता है। मानसिक रूप से भी आसन करने के लिए खुद को तैयार करें।
क्या करें आसन करते समय
मन को स्थिर रखते हुए पूरा ध्यान आसन की संपूर्णता पर ही केंद्रित करें। प्रसन्नाचित्त हो कर अभ्यास प्रारंभ करें और
मन में यह विचार करें कि इस योगाभ्यास से मेरे मन और शरीर पर सकारात्मक परिणाम होने वाले हैं। योगाभ्यास के
समय ऑटोसजेशन भी करते रहें। योगासन के प्रारंभ और समापन के समय प्रभु का ध्यान करें और उन्हें धन्यवाद दें। योगाभ्यास के दौरान मधुर एवं कर्णप्रिय वाद्य संगीत सुन सकते हैं। टीवी के सामने योगाभ्यास न करें क्योंकि इससे ध्यान भटकता है।
अपनी शारीरिक क्षमता को भी पहचानें
योगाभ्यास में शरीर और मन मस्तिष्क का योग शामिल है। मन और मस्तिष्क भले हो आसन पूर्ण करने के लिए दबाव बनाएं लेकिन अपने शरीर की आवाज भी सुनें। अपनी शारीरिक क्षमता को पहचानते हुए आसन को पूर्ण करने के लिए जोर लगाएं। यदि दर्द अथवा पीड़ा का अनुभव हो रहा हो तो वहीं रुक जाएं। पुनः पूर्वावस्था में लौट आएं और नए सिरे से आसन प्रारंभ करें। एक दिन शरीर इतना लचीला हो जाएगा की आसानी से ही आसन पूरा हो सकेगा।
तनाव मुक्त रहते हुए करें अभ्यास
आसन की प्रकृति और प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए ही अभ्यास करें। जल्दबाजी और स्टेप्स को छोड़ते हुए आसन पूरा करने की उतावली न करें। इससे फायदे स्थान पर नुकसान अधिक होगा।
लयबद्धता को बनाए रखें
आसन हमेशा लयबद्ध तरीके से हीपूर्ण किया जाता है। इसलिए रिदम बनाए रखें। याद रहे कि अभ्यास के दौरान किसी तरह का झटका शरीर को न लगे। दो आसनों के बीच के अंतराल में आने वाले आसन पर विचार केंद्रित करें। उस दौरान गहरी सांस लें और कुछ क्षण विश्राम कर लें। यदि समूह में योगाभ्यास कर रहे हों तो दूसरों को देखकर उन्हीं की तरह करने का प्रयास न करें। हर शरीर अलग होता है और उसकी क्षमताएं भी भिन्न होती हैं। इसलिए खुद के शरीर पर ध्यान दें न कि दूसरों की नकल करें।
क्या करें आसनों के बाद
- दस से पंद्रह मिनट प्राणायाम करें। पूर्ण शांति का अनुभव करें।
- योगाभ्यास पूरा होने के बाद ध्यान तथा जप अवश्य करें।
- यदि पहले स्नान न किया हो तो योगाभ्यास के बाद तेल मालिश करें और फिर नहाएं।
- योगाभ्यास कर चुकने के आधे घंटे बाद ही नाश्ता करें।
- याद रहे कि योगाभ्यास शुरू करने के शुरूआती दौर में 5 से 7 दिन तक शरीर में अकड़न एवं थकावट महसूस हो सकती है। इसे लेकर घबराएं क्योंकि यह शरीर में आ रहे परिवर्तनो का द्योतक है।
- यथा संभव संतुलित एवं शाकाहारी भोजन करें। आहार में फल दूध एवं हरी सब्जियों को जरूर शामिल करें।प्रोटीन और विटामिन की आपूर्ति दालों और बीन्स से करें।
- फास्ट फूड एवं जंक फूड से दूर रहें। तले हुए खाद्य पदार्थों को नमस्ते कर दें।
- डॉ. राजेंद्र पंडित, योगाचार्य