
जयपुर। राजस्थान में आने वाले सत्र से स्कूल व उच्च शिक्षा में कई बदलाव किए जाएंगे। हर विश्वविद्यालय और काॅलेज में राष्ट्रीय ध्वज फहराना अनिवार्य होगा, स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगाई जाएगी और पहली कक्षा से संस्कृत अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाई जाएगी।
राजस्थान के शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी का कहना है कि राजस्थान से कोई कन्हैया पैदा न हो, इसके लिए बच्चों को देेशभक्तों की जीवनियां पढ़ाई जाएंगी।
राजस्थान विधानसभा में शिक्षा विभाग की अनुपूरक अनुदान मांगों पर हुई चर्चा के बाद उच्च शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ और शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि राजस्थान के विद्यार्थियों को संस्कारित बनाने के लिए सभी प्रयास सरकार करेगी।
देवनानी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में खामी की वजह से जेएनयू में देश विरोधी और देश के बंटवारे के नारे लगे। हम बच्चोें को गीता पढ़ाएंगे, अशफाक उल्लाह खान, महाराणा प्रताप, हेमू कालानी, महाराणा प्रताप जैसे देशभक्तों की जीवनी पढ़ाएंगे। शिक्षा व्यवस्था में खामियों को दूर कर देशप्रेम की भावना जगाने वाली शिक्षा दी जाएगी।
उच्च व संस्कृत शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ ने कहा कि अगले सत्र से सभी सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से ही विद्यार्थी संस्कृत पढ़ेंगे। पहली क्लास की संस्कृत की किताबें छपने वाली हैं, नए सत्र से पहली क्लास से संस्कृत की पढ़ाई शुरू हो जाएगी।
सराफ ने अगले सत्र से कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए भी आॅनलाइन एडमिशन लागू करने की घोषणा की।सराफ ने कहा कि सरकारी विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समाराहों में गाउन की जगह नया ड्रेस कोड लागू कर दिया है। दीक्षांत समारोह में अब छात्र सफेद कुर्ता पाजामा और छात्राएं साड़ी या सलवार सूट पहनेंगी।