
हरिओम गौड़, श्योपुर। एक शिक्षक के भरोसे कई विद्यार्थी जैसे कई मामले आपने सुने या पढ़े होंगे , लेकिन एक शिक्षक दो स्कूलों की 10 कक्षाओं को संचालित कर रहा हो। ऐसा मामला कराहल विकास खण्ड के स्यावड़ी गांव में सामने आया है। इस गांव में दो सरकारी प्राइमरी स्कूल हैं।
दोनों ही स्कूलों के संचालन का जिम्मा शिक्षक कोमल सिंह जाट पर है। विगत ढाई साल से कोमल जाट उक्त दोनों स्कूलों के 80 छात्र-छात्राओं को पढ़ाने का काम बारी-बारी से कर रहे हैं। यदि बीमारी या अन्य किसी कारण से 50 साल का यह शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच पाता तो, उस दिन दोनों स्कूल बंद हो जाते हैं।
जिला मुख्यालय से करीब 22 किमी दूर जंगल में बसे स्यावड़ी गांव में छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा दो स्कूल (शा. प्रा. स्कूल स्यावड़ी-ए और शा.प्रा. वि. स्यावड़ी-बी) संचालित किए जा रहे हैं। दोनों स्कूलों के लिए अलग- अलग भवन भी बनाए गए हैं।
दोनों स्कूलों का स्टॉफ भी अलग-अलग था। विगत ढाई साल से एक स्कूल स्टॉफ विहीन हो गया। कोमल सिंह प्राथमिक स्कूल ए में शिक्षक होकर उसके पास हेडमास्टर का प्रभार है। उधर प्राथमिक स्कूल बी में पदस्थ शिक्षक सुरेश जाट को ढाई साल पहले गंभीर बीमारी के चलते उसके गांव राडेप में अटैच कर दिया गया।
प्राइमरी स्कूल-बी की दूसरी शिक्षिका सविता डाबर दो साल पहले डीएड करने के लिए शासन से छुट्टी लेकर चली गईं। शिक्षक विहीन हुए इस स्कूल का चार्ज भी कोमल सिंह पर आ गया। प्राथमिक स्कूल-ए में 43 एवं स्कूल क्रमांक बी में 36 छात्र-छात्राओं को 1 से 5वीं क्लास तक पढ़ाने का काम अकेले कोमल सिंह पर आ गया।
पीरियड की तरह बदलता है शिक्षक स्कूल
विडंबना यह है कि ग्रामीण शिक्षक को दोनों स्कूलों के विद्यार्थियों को एक स्कूल में एकत्रित भी नही होने देते हैं। एक ही भवन में दोनों विद्यालय संचालित करने पर ग्रामीण यह कहकर विरोध करते हैं कि, हमारे बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह क्यों ठूंस रहे हो।
इसलिए शिक्षक को दोनों विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को अलग- अलग भवनों में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। जिस तरह स्कूलों में शिक्षकों के पीरियड लगाए जाते हैं, उसी तरह शिक्षक कोमल सिंह बारी- बारी कभी इस स्कूल में तो कभी उस स्कूल में पहुंचकर पढ़ाई कराता है।
बारी- बारी से विद्यालय बदलकर पढ़ाई कराने वाले शिक्षक कोमल सिंह की कभी भी स्कूल समय नहीं आने की शिकायत नहीं मिली है। वर्तमान में एक भवन बारिश में टपकने के कारण जरूर दोनों स्कूलों के छात्रों को एक ही भवन में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। बारिश नहीं होने पर स्कूल अलग- अलग लगाए जाते हैं।
स्कूल के अलावा दूसरी जिम्मेदारियां भी निभा रहा शिक्षक
शिक्षक कोमल सिंह पर हेडमास्टर का प्रभार होने के चलते उसे समय-समय पर जानकारी देने के लिए कराहल मुख्यालय पर जाना पढ़ता है। इसके अलावा कोमल पर बीएलओ का प्रभार भी रहा है। हाल ही में कलेक्टर ने कोमल पर दो विद्यालयों का प्रभार होने के चलते उसे बीएलओ पद से मुक्त कर दिया है।
स्कूल में बच्चों को दूध पिलाना एवं कराहल मुख्यालय पर पहुंचकर जानकारी देना एवं सामग्री लेकर आने की जिम्मेदारी भी प्रभारी हेडमास्टर होने के नाते कोमल सिंह पर ही है। इन जिम्मेदारियों के बीच भी कोमल सिंह दोनों स्कूलों को अकेले संचालित कर रहा है। स्कूल में छात्र-छात्राओं की संख्या भी हमेशा 80 प्रतिशत से अधिक रहती है।
इनका कहना है
- मेरी पदस्थापना प्राथमिक स्कूल ए में हुई है। बी स्कूल में दोनों शिक्षक चले जाने से उसका प्रभार भी मुझे सौंप दिया है। दो स्कूलों और 80 छात्रों को पढ़ाना मुश्किल काम है। मैं वरिष्ठ अधिकारियों से स्कूल में और शिक्षक भेजने की मांग कर चुका हूं।
कोमल सिंह जाट सहायक अध्यापक, शा.प्रा.वि.स्यावड़ी
यदि ऐसा है तो वास्तव में चिंता का विषय है। मैं इस संबंध में तत्काल डीईओ से बात करता हूं। उक्त स्कूल में बहुत जल्द या तो शिक्षक की व्यवस्था होगी या फिर अतिथि शिक्षक रखे जाएंगे। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने देंगे।
सौरभ कुमार सुमन कलेक्टर, श्योपुर