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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 25, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नौवीं तक पहुंचने वाले आधे छात्र कर लेते हैं नशे का सेवन

भारत में लगभग 7.3 करोड़ लोग नशे का सेवन करते है और इनमें से 70 फीसदी इसके आदि है।

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Publish Date: Thu, 25 Jun 2015 10:36:02 PM (IST)Updated Date: Fri, 26 Jun 2015 03:20:38 PM (IST)
नौवीं तक पहुंचने वाले आधे छात्र कर लेते हैं नशे का सेवन

अनिल पांडेय, मल्‍टीमीडिया डेस्‍क। भारत में लगभग 7.3 करोड़ लोग नशे का सेवन करते है और इनमें से 70 फीसदी इसके आदि है। यही नहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में दस लाख युवा हेरोइन जैसे नशे की चपेट में आ चुके हैं। जबकि गैर सरकारी आंकड़े यह संख्या 50 लाख के करीब होने का दावा करती है। वैश्विक स्तर की बात करें तो नशे का अवैध व्यापार 500 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है।

पेट्रोल और हथियारों के बाद दुनिया में नशे का व्यापार सबसे बड़ा धंधा बन गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अध्‍ययन के अनुसार 18 वर्ष की आयु के युवा नशेड़ियों की संख्या बहुत अधिक है। देश में दस लाख युवा हेरोइन के नशे की चपेट में है। भारत में नौवीं कक्षा तक पहुंचने वाले कुछ छात्रों में से 50 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्होंने कम से कम एक बार नशे का सेवन किया है।


अंतरराष्‍ट्रीय नशा निवारण दिवस

मादक पदार्थों और द्रव्यों के सेवन को हतोत्साहित करने के लिए 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य समाज में नशे की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के साथ ही युवाओं को इस बुराई के प्रति जागरूक करना है। संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ की सहमति से 1987 से पूरी दुनिया में नशा विरोधी दिन मनाया जाता है।

नशीली दवाइयों का व्‍यसन और दुरुपयोग

नशीली दवाइयों का व्‍यसन और पदार्थों का दुरुपयोग एक चिरकालिक आवर्ती रोग है जिसमें इसका प्रयोग करने वाला विवश होकर किसी अवैध औषधि की खोज तथा प्रयोग में समय नष्‍ट करता है।

नशे‍ड़ि‍यों द्वारा प्रयुक्‍त कुछ सामान्‍य ड्रग्‍स हैं : हीरोइन, कोकीन, लिसर्जिक एसिड डाइएथिलऐमाइड (एलएसडी), मैन्‍ड्रैक्‍स, बार्बिटयूरेट और विभिन्‍न ओपिएट।

पारंपरिक रूप, से भारत में नशीली दवाइयों के व्‍यवसनियों को उस परिवार या सामाजिक समूह की जिम्‍मेदारी माना जाता है जिससे वे संबंधित हों। अधिकांश मामलों में, व्‍यसनियों का उपचार सामान्‍य स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के माध्‍यम से स्‍वैच्छिक आधार पर किया जाता है।

अब राज्‍य स्‍तर के अस्‍पताल भी अपने मनश्चिकित्‍सा विभागों के माध्‍यम से दु:साध्‍य व्‍यसनियों के अंतरंग उपचार के लिए पुनर्वास की सुविधाएं उपलबध कराते हैं। राज्‍य चालित उपचार केंद्रों के अतिरिक्‍त, स्‍वैच्छिक संगठनों द्वारा चलाए जा रहे नशा छुड़वाने वाले केंद्रों का एक नेटवर्क है और देश के विभिन्‍न प्रदेशों में समुदाय आधारित उपचार कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।

भारत में अकबर के काल में शुरू हुआ तम्बाकू का नशा

इन कार्यक्रमों का मुख्‍य उद्देश्‍य यह है कि व्‍यसनियों के अपने परिवार तथा समुदाय के साथ संबं‍ध मजबूत किए जाएं और उनकी पुनर्वास प्रक्रिया में समुदाय से सहयोग लिया जाए। गैर सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे नशा छुड़वाने वाले केंद्र व्‍यसनियों के इलाज के लिए कई प्रकार की मनश्चिकित्‍सा के साथ उपचार की विभिन्‍न प्रणालियों का प्रयोग करते हैं यथा ऐलोपैथी, होमियोपैथी, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्‍सा और योग।

पुनर्वास और अनुसंधान केंद्र

औषध दुरूपयोग सूचना पुनर्वास और अनुसंधान केंद्र एक पंजीयित धर्मार्थ ट्रस्‍ट है जो व्‍यसनियों के पुनर्वास में लगा हुआ है। इसकी स्‍थापना 1982 में मुबंई नगर में हुई थी। यह केंद्र विविध प्रकार की पुनर्वास सेवाएं उपलब्‍ध कराता है यथा हीरोइन व्‍यसन उपचार, कोकीन व्‍यसन उपचार, सॉल्‍वेंट दुरुपयोग उपचार, निर्धा‍रित औषधियों के व्‍यसन के प्रति उपचार, मेथाडोन व्‍यसन उपचार और दुरुपयोग की अन्‍य सभी औषधियों के व्‍यसन के लिए उपचार।

यदि औषधियों के व्‍यसनियों का पूरी तरह पुनर्वास करना है तो जरूरी है कि व्‍यसनियों के उपचार और सामाजिक एकीकरण के लिए स्‍थानीय समुदाय को शामिल किया जाएं। इस उपक्रम को आगे बढ़ाने के लिए स्‍वैच्छिक संगठनों के माध्‍यम से समुदाय स्‍तर पर नशा छुडवाने वाले अनेक शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं।

ये शिविर व्‍यसनियों को उन बस्तियों में परामर्श, उपचार और पुनर्वास की सुविधाएं उपलबध कराते हैं जहां वे रहते हैं। जागरुकता पैदा करना और चिकित्‍सीय समुदाय स्‍थापित करना अन्‍य अवधारणाएं जो व्‍यसनियों के पुनर्वास में मदद करती है।

विभिन्‍न प्रकार के व्‍यसनों के उपचार में स्‍वावलंबन तकनीकें काफी उपयोगी सिद्ध हुई हैं। ये तकनीकें उपलब्‍ध कराने वाला एक लो‍कप्रिय समूह नार्कोटिक्‍स ऐनॉनिमस है। यह समूह निजी बैठकें आयोजित करता है जहां व्‍यसनी दूसरे व्‍यसनियों से सीखते हैं कि नशीली औषधियों से मुक्‍त कैसे रहा जाए और व्‍यसन से कैसे उबरा जाए। ये बैठकें बैंगलूर, मुंबई, नई दिल्‍ली तथा चेन्‍नई आदि नगरों में नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं।

राष्‍ट्रीय औषधि दुरूपयोग निवारण केंद्र ने 8 गैर सरकारी संगठनों की पहचान की है जिनके पास प्रादेशिक स्‍तरों पर प्रशिक्षण एवं जानकारी उपलब्‍ध कराने के लिए, कार्यक्रमों की निगरानी करने के लिए और औषधि दुरूपयोग निगरानी तंत्र को क्रियान्वित करने के लिए सुदृढ़ तकनीकी क्षमताएं हैं।

ये गैर सरकारी संगठन हैं गैलेक्‍सी क्‍लब, कृ‍पा फाउंडेशन, द कलाकत्ता सैमारिटन्‍स, मिजोरम सोशल डिफेन्‍स एंड रीहैबिलिटेशन बोर्ड, मुक्‍तांगन मित्र, सोसाइटी फॉर प्रोमोशन ऑफ यूथ एंड मासिज, टी टी रंगनाथन क्लिनिकल रिसर्च फाउंडेशन और विवेकानंद एजुकेशन सोसाइटी।

नशा व्यापार में दिल्ली, मुंबई सबसे ऊपर

सबसे ज्यादा नशे का व्यापार करने वाले देश के 50 से ज्यादा शहरों की सूची में मुंबई और दिल्ली सबसे ऊपर हैं। जबकि तीसरे स्थान पर पंजाब और उसके बाद उत्तर प्रदेश का स्थान है। यह जानकारी राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो की संरचना (एनसीआरबी) ने दी है।

एनसीआरबी ने 2012 के आंकड़ों के हवाले से कहा कि मुंबई में नशा व्यापार और तस्करी के 1,512 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि दिल्ली में 829 मामले दर्ज हुए थे। इस तरह नशे के व्यापार के मामले में देश के कुल 53 शहरों में मुंबई और दिल्ली अब तक के अग्रणी शहर हैं।

जबकि 2013 के आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं। दिल्ली के बाद कानपुर (उत्तर प्रदेश) में नशा व्यापार से संबंधित 551 मामले जबकि अमृतसर (पंजाब) में 457 और कोटा (राजस्थान) में 242 मामले दर्ज किए गए।

इस मामले में महाराष्ट्र के वसइ विरार (2), बिहार के औरंगाबाद (3), झारखंड के धनबाद एवं रांची (4) और गुजरात के राजकोट (5) में अपेक्षाकृत कम प्राथमिकी दर्ज हुए हैं। साल 2012 में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक संब्सटैंस एक्ट, 1985 के तहत 29,247 मामले दर्ज किए गए थे, जो पिछले साल यानी 2011 की तुलना में 13.4 प्रतिशत बढ़ गए।

2011 में यह आंकड़ा 29,048 था। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब सबसे ज्यादा नशे की तस्करी और व्यापार करने वाले राज्य के रूप में उभरा है, जहां 2012 में 10,220 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं, उत्तर प्रदेश में 6,755 मामले, महाराष्ट्र में 1,903 मामले, तमिलनाडु में 1,402 मामले और राजस्थान में 1,115 मामले दर्ज किए गए थे। जम्मू एवं कश्मीर में नशे से संबंधित 411 मामले और गुजरात में 68 मामले दर्ज हुए थे।

सिक्किम में तीन मामले, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में चार, पुदुचेरी में छह और लक्षद्वीप में 11 मामले दर्ज किए गए थे। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक कुल 13,459 लोगों को गिरफ्तार किया गया जिसमें 216 विदेशी शामिल हैं। इनके पास से 89,519 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए जिनमें मुख्य रूप से ओपियम, मारफीन, हेरोइन, गांजा, हशीश, कोकीन, एफीड्राइन शामिल हैं।

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 13 तरह के नशीले पदार्थो की तस्करी की जाती है जिनकी कीमत 1.5 लाख रुपये से लेकर 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम होती है। हेरोइन भारत में जम्मू, अमृतसर और राजस्थान की सीमा से लाई जाती है वहीं चरस मनाली से, गांजा ओडिशा और झारखंड से लाए जाते हैं। भारत भर में नशे का व्यापार और तस्करी का नेटवर्क पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान में फैसा हुआ है।