
अमित जलधारी, इंदौर। खुद आईएएस और कुलपति रहने के बाद सांसद हैं। पत्नी साहित्यकार हैं और सरकार उन्हें पद्मश्री दे चुकी है। बेटी आईपीएस है। तीनों अपने-अपने तरीके से समाज को जोड़ते हैं, लेकिन जाति और धर्म का बैरियर मां-बेटी के बीच है। बेटी मां को एक प्लॉट देना चाहती है, लेकिन नियम ऐसा नहीं करने दे रहे।
मामला भिंड से सांसद डॉ. भागीरथप्रसाद की साहित्यकार पत्नी पद्मश्री मेहरून्निासा परवेज और इंदौर में पदस्थ उनकी बेटी आईपीएस सिमाला प्रसाद का है। सुश्री सिमाला ने 2008-09 के दौरान आईडीए की पीपल्याहाना स्थित स्कीम-140 में करीब 2400 वर्गफीट का प्लॉट टेंडर से खरीदा था। अब रजिस्ट्री से पहले वे अपनी यह जमीन मां मेहरून्निासा परवेज को देना चाहती हैं, लेकिन आईडीए के नियम इसकी इजाजत नहीं दे रहे। प्लॉट अनुसूचित जाति वर्ग श्रेणी के तहत सिमाला प्रसाद को बेचा गया है, इसके विपरीत श्रीमती परवेज मुस्लिम हैं।
श्रीमती परवेज ने इसी साल अक्टूबर में आईडीए को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि स्कीम-140 में बेटी सिमाला द्वारा खरीदा गया प्लॉट नं. 312-बी उनके नाम ट्रांसफर किया जाए। उनका कहना था कि उक्त भूखंड की पूरी राशि उन्होंने और उनके पति डॉ. प्रसाद ने चुकाई है। बेटी सिमाला पारिवारिक कारणों से उक्त प्लॉट मुझे देना चाहती हैं। पत्र के साथ उन्होंने पति डॉ. भागीरथ प्रसाद पिता मथुरा प्रसाद का जाति प्रमाण पत्र भी भेजा, लेकिन बात नहीं बनी। श्रीमती परवेज वर्तमान में भोपाल के शाहपुरा इलाके की अरेरा कॉलोनी में रहती हैं, जबकि बिटिया सिमाला प्रसाद इंदौर में एएसपी हैं।
आईडीए मांगेगा जाति प्रमाण पत्र
प्रकरण जब आईडीए संपदा शाखा पहुंचा तो नियम-कायदे खंगालने का सिलसिला शुरू हुआ। पता चला कि आईडीए आवंटित प्लॉट किसी ऐसे व्यक्ति को ही ट्रांसफर कर सकेगा, जिसके संबंध में ग्राही द्वारा अनुरोध किया गया है, लेकिन वह व्यक्ति उसी श्रेणी का है। अब आईडीए श्रीमती परवेज से उनकी जाति का प्रमाण पत्र मांगेगा।
मेरे पास मुस्लिम का प्रमाण पत्र
मेरे पास अनुसूचित जाति का नहीं, बल्कि मुस्लिम जाति का प्रमाण पत्र है। प्लॉट की ज्यादातर किस्तें मैंने जमा की हैं और ट्रांसफर का मकसद इसे बेचना नहीं है। चूंकि अब सिमाला प्रसाद सर्विस में हैं इसलिए रजिस्ट्री से पहले प्लॉट ट्रांसफर को लेकर पारिवारिक समझौता हुआ है।
- पद्मश्री मेहरून्निसा परवेज, साहित्यकार
कुछ नहीं कहना
मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना।
सिमाला प्रसाद, एएसपी, इंदौर
सीधा सा प्रकरण है
श्रीमती परवेज का प्रकरण सीधा सा है। सालों पुराना नियम है कि पिता की जाति ही बेटी की जाति मानी जाती है, लेकिन पति-पत्नी के मामले में ऐसा नहीं है। कोई महिला केवल शादी करके पति की जाति की नहीं हो सकती। इस मामले में भी आईडीए इसी नियम के आधार पर काम कर रहा है।
- एमपी विमल, संपदा अधिकारी, आईडीए