
सुमित अवस्थी, खंडवा(मध्यप्रदेश)। अपनी परंपराओं और बोली को संरक्षित करने के लिए जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर ग्राम सेंधवाल की प्रमिला चौहान ने कोरकू की डिक्शनरी बनाई है। इसमें कोरकू परंपराओं और त्योहारों को भी शामिल किया है। पांचवीं कक्षा तक पढ़े किसान पिता और निरक्षर मां की बेटी 20 वर्षीय प्रमिला का कहना है कि कोरकू संस्कृति प्रकृति से जुड़ी हुई है। इसे विशेष पहचान दिलाने के लिए यह प्रयास किया है।
खालवा ब्लॉक में कोरकू समाज की जनसंख्या 1 लाख से अधिक है। इसके साथ ही बैतूल, हरदा, होशंगाबाद, भोपाल और महाराष्ट्र के मेलघाट सहित सतपुड़ा पर्वतमाला के गांव में कोरकू समाज के लोग निवास करते हैं। समाज में करीब 50 फीसद से अधिक लोग या तो निरक्षर हैं या जल्द ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। ऐसे में कोरकू संस्कृति का न तो प्रचार-प्रसार हो पाता है और न ही बोली को लिपिबद्ध किया जा सका है। प्रमिला का कहना है कि आधुनिकता के कारण कई शब्द बोलचाल से विलुप्त होते जा रहे हैं।
पिता ने दी प्रेरणा
बीए फाइनल ईयर की छात्रा प्रमिला कहती हैं कि पिताजी ने मुझे इस काम के लिए प्रेरित किया। इधर पिता ने कहा कि बेटी मैं तो ज्यादा पढ़ाई नहीं कर सका लेकिन तू कुछ ऐसा कर जो समाज के लिए मिसाल बने। छात्रा ने डिक्शनरी में कोरकू त्योहारों के प्रकृति से संबंध को भी शामिल किया है। इससे कोरकू संस्कृति को अन्य लोग भी जान सकेंगे।
डिक्शनरी में 1 हजार शब्द
प्रमिला की डिक्शनरी में कोरकू बोली के एक हजार शब्द हैं। हिंदी से कोरकू और कोरकू से हिंदी में इस डिक्शनरी में शब्दों को क्रिया, विश्लेषण और संज्ञा के आधार पर भी बांटा गया है। डिक्शनरी के पब्लिकेशन के लिए प्रमिला की चर्चा दिल्ली की प्रवाह संस्था से चल रही है। छात्रा का कहना है कि वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कोडक्शनरी भेंट कर उसे कोरकू बहुल इलाकों में पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग करेगी।