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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 25, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ये कैसा RTE, जहां देने पड़ते हैं 50 हजार

गरीब अभिभावक अपने लाडले के एडमिशन के लिए पहुंचे तो फीस के अलावा वहां के खर्चे सुनकर अब एडमिशन कराने से मना कर रहे हैं।

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Publish Date: Wed, 25 Jul 2018 12:02:56 PM (IST)Updated Date: Thu, 26 Jul 2018 08:27:37 AM (IST)
ये कैसा RTE, जहां देने पड़ते हैं 50 हजार

भोपाल (अंजलि राय)। शिक्षा के अधिकार (आरटीई ) के तहत निजी स्कूलों में एडमिशन के लिए लॉटरी निकलने से गरीब अभिभावकों में खुशी का माहौल था, लेकिन उनका सपना उस समय धराशायी हो गया जब उन्हें पता चला कि यहां नि:शुल्क नहीं बल्कि 50 से 60 हजार रुपए खर्च करने होंगे। 2018-19 में आरटीई के तहत राजधानी के सबसे महंगे स्कूल में जब गरीब अभिभावक अपने लाडले के एडमिशन के लिए पहुंचे तो फीस के अलावा वहां के खर्चे सुनकर अब एडमिशन कराने से मना कर रहे हैं। आरटीई के तहत निजी स्कूल को एक बच्चे के लिए 4400 रुपए मिलते हैं, लेकिन गरीब अभिभावकों से निजी स्कूल बस फीस, एक्टिविटी चार्ज आदि के नाम पर 50 से 60 हजार रुपए वसूल रहे हैं।

आरटीई के तहत प्रावधान

शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत यह प्रावधान है कि निजी स्कूलों में आरटीई के तहत पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल में किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जाएगी। सिर्फ स्कूल ड्रेस, कॉपीकिताब, बस किराया पर ही खर्च करना पड़ेगा। इसके बावजूद निजी स्कूल सिर्फ एडमिशन व ट्यूशन फीस नहीं लेती है। वहीं, निजी स्कूलों के संचालकों का कहना है कि सरकार द्वारा मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि कम है। इतने में नहीं होता।


लॉटरी निकली तो खुश हुए पर फीस सुन उड़े होश

डीपीएस में नहीं दिलाएंगे प्रवेश बिशनखेड़ी निवासी सलीम हसन की बेटी उमरा का आरटीई के तहत डीपीएस में एडमिशन के लिए लॉटरी निकला था। वेल्डिंग का काम करने वाले सलीम कहते हैं कि खुद तो नहीं पढ़ सका, लेकिन बेटी को बड़े स्कूल में पढ़कर डॉक्टर बनाएंगे। सलीम के सपने पर उस समय पानी फिर गया जब उन्हें पता चला कि स्कूल में सिर्फ फीस माफ है, अन्य खर्चें मिलाकर लगभग 60 हजार रुपए लगेंगे तो उन्होंने डीपीएस में एडमिशन कराने का फैसला बदल लिया।

पान के ठेले से चलता है घर खर्च बरखेड़ी निवासी किरण यादव के बेटे हर्ष का आरटीई के तहत डीपीएस में एडमिशन के लिए नाम आया है। जब लॉटरी में नाम आया तो किरण व उनके पति कैलाश काफी खुश थे, कि

खुद तो पान ठेला चलाकर कमाते हैं, लेकिन बेटे को अच्छे स्कूल में पढ़ाएंगे। जब उन्होंने पता किया तो स्कूल में फीस के अलावा अन्य चार्जेस लिए जाते हैं। किसी तरह गुजारा चलता है, लेकिन 50 से 60 हजार रुपए खर्च नहीं कर पाएंगे। इससे बेहतर कोई छोटे स्कूल में पढ़ा लेंगे।

निजी स्कूल में सालभर के खर्चे

एडमिशन फीस: 60 हजार (फ्री)

ट्यूशन फीस: 50 हजार (फ्री)

री- एडमिशन फीस: 34 हजार (फ्री)

औसतन इतना शुल्क देना होगा

स्कूल एसेंसियल: 16000

नेविएंस प्रोग्राम: 1100

लैबोरेट्री चार्ज: 4000

स्पोर्ट्स व परफार्मिंग फीस: 9000

कॉपी-किताब: 5000

यूनिफार्म: 3000

बस: 2000

पिकनिक व आई कार्ड: 1000

जूते-मोजे: 1500

स्कूल बैग: 500

बेल्ट व टाई: 300

वॉटर बॉटल: 200

कम्पॉक्स व लंच बॉक्स: 500

कुल खर्च: 44 हजार 100 रुपए

इनका कहना है

2010 में शासन की ओर से आरटीई के तहत 2500 रुपए

एक बच्चे के लिए मिलता था, लेकिन अब 4400 रुपए है, लेकिन अभी तक दो सालों की फीस प्रतिपूर्ति नहीं की गई। जिससे मजबूरन निजी स्कूल अन्य चार्जेज लेने के लिए मजबूर हैं - अजीत सिंह, अध्यक्ष,

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन

आरटीई के तहत सिर्फ शिक्षण व नामांकन शुल्क नि:शुल्क है, ट्रांसपोर्टेशन, एक्टिविटी व अन्य शुल्क लिए जाएंगे - दीपक जोशी, राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा