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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 16, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पाकिस्तान में भी लोकप्रिय थे अटलजी, जनरल जिया उल हक ने भेजा था ये तोहफा

एक साफ-सुथरे नेता के रूप में उनकी लोकप्रियता भारत ही नहीं, दुनियाभर में हैं।

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Publish Date: Thu, 16 Aug 2018 04:51:03 PM (IST)Updated Date: Thu, 16 Aug 2018 05:48:12 PM (IST)
पाकिस्तान में भी लोकप्रिय थे अटलजी, जनरल जिया उल हक ने भेजा था ये तोहफा

मल्टीमीडिया डेस्क। दिल्ली के एम्स में भर्ती भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की सलामती के लिए आज देशभर में दुआएं हो रही थी लेकिन गुरुवार शाम 5.05 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। इनकी शख्सियत ही ऐसी है कि विपक्ष के लोग तक उनका आदर करते हैं। एक साफ-सुथरे नेता के रूप में उनकी लोकप्रियता भारत ही नहीं, दुनियाभर में थे। यहां तक कि पाकिस्तान में भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं रहीं।

इसका सबूत ये एक किस्सा है। आपातकाल के बाद साल 1977 में बनी मोरारजी देसाई की सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी जब विदेश मंत्री बने तब पाकिस्तान में भी बेहद लोकप्रिय थे। हालांकि यह सरकार बहुत दिनों तक चल न सकी। सरकार गिरने के बाद एक दिन वाजपेयी अपने घर पर चाय की चुस्कियां ले रहे थे। तभी पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल सत्तार एक तोहफा लेकर पहुंचे।


सत्तार ने वाजपेयी को कहा कि आप तो पाकिस्तान में इतने लोकप्रिय हैं कि वहां से चुनाव लड़ें तो दूसरों की जमानत जब्त हो जाएगी। सत्तार ने वाजपेयी को बताया कि यह उपहार जनरल जिया उल हक ने उनके लिए भेजा है। उस पैकेट में एक पठानी सूट था। वाजपेयी पैकेट लेकर अंदर गए और कुछ ही देर में पठानी सूट पहनकर बाहर निकले और सत्तार को कहा कि जनरल साहब को बता देना कि मैंने उनका तोहफा पहन लिया है।

अपने दफ्तर में फिर लगवाई थी नेहरू की तस्वीर

विदेश मंत्री बनने के बाद अटलजी जब पहले दिन विदेश मंत्रालय पहुंचे तो उन्होंने देखा कि दफ्तर की एक दीवार से कुछ गायब है। वाजपेयी ने अपने सचिव से कहा कि यहां तो पंडित जवाहरलाल नेहरू की तस्वीर लगी होती थी। पहले भी कई बार मैं इस दफ्तर में आया हूं, अब कहां गई?

पता चला कि जब गैर कांग्रेसी सरकार बनी तो विदेश मंत्रालय के अफसरों को लगा कि जनसंघ से आने वाले नए विदेश मंत्री को नेहरू की तस्वीर अच्छी नहीं लगेगी। इसलिए उन्हें खुश करने के लिए अधिकारियों ने नेहरू की तस्वीर हटा दी थी। इसके बाद वाजपेयी ने विदेश मंत्रालय के अफसरों को जितनी जल्दी हो सके उस तस्वीर को फिर से लगाने का आदेश दिया।