
- श्री श्री रविशंकर
युद्ध केवल मनुष्यों तक ही सीमित है। इस सृष्टि के किसी अन्य जीव में युद्ध या सामूहिक संहार नहीं होता। पशु बस अपना शिकार करते हैं और बाकी सब वैसा का वैसा ही छोड देते हैं। पर मानव प्राचीन काल से ही युद्ध में निमग्न है योंकि मनुष्य का जीवन तर्क पर आधारित है।
समझ के द्वारा किया गया सबसे बुरा कार्य युद्ध है। हरेक युद्ध के पीछे कोई न कोई कारण होता है और वह ही कारण उस युद्ध को उचित सिद्ध करता है। जो लोग युद्ध में लगे हुए हैं, वे उसे तर्क संगत बातें हैं। पर एक सीमा के भीतर ही किसी तर्क को तर्क संगत सिद्ध किया जा सकता है। अपनी समझ बदलने से उस तर्क की सफाई देने वाला तर्क टूट जाता है। थोड़े से लोगों को ही और थोड़े समय के लिए ही युद्ध उचित् लगता है। तभी, इस ग्रह पर युद्ध अटल हो जाता है।
युद्ध केवल मनुष्यों तक ही सीमित है। इस सृष्टि के किसी अन्य जीव में युद्ध या सामूहिक संहार नहीं होता योंकि उनके पास कोई तर्क-वितर्क नहीं होता। पशु बस अपना शिकार करते हैं और बाकी सब वैसा का वैसा ही छोड देते हैं। पर मानव प्राचीन काल से ही युद्ध में निमग्न है योंकि मनुष्य का जीवन तर्क पर आधारित है। मनुष्य अपने हर कृत्य के पीछे कोई न कोई कारण देता है और उसे उचित सिद्ध करता है। जैसे-जैसे कारण बदलते हैं, उस कृत्य को न्यायोचित सिद्ध करने वाला आधार भी समाप्त हो जाता है।
मनुष्य को तर्क-वितर्क के परे जाना होगा तभी वो परम तत्व को जान पाएगा और फिर वह युद्ध में संलग्न नहीं होगा। युद्ध का अंत तभी हो सकेगा जब लोगों की सोच सुलझी हुई होगी, दिल में घृणा नहीं होगी और उच्च चेत्ना होगी।
क्यों होता है आतंकवाद
ऐसा कार्य जिसमें केवल विनाश हो और जो अपने व औरों के लिए दुखदायी हो, वह आतंकवाद कहलाता है। ऐसे कार्य में लक्ष्य को पाने के लिए मानवीय मूलों को भुला दिया जाता है। वो कारण जो मनुष्य को आतंकवाद की त्रफ जाने के लिए प्रेरित करते हैं वो हैं...
आतंकवाद सभी में दहशत लाता है, गरीबी और पीडा को बढाता है, जीवन को हानि पहुंचाता है और इससे किसी को भी प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिलता। जीवन-समथर्थक हल ढूंढने के बजाय आतंकवादी विध्वंस के द्वारा ही जवाब देने में विश्वास रखता है। यदि तुम बिना किसी हल के कोई निंदा करते हो तो जान लो कि यह निंदा भी उसी बीज से निकलती है जिससे आतंकवाद निकलता है।
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हालांकि, आतंकवादी में कुछ गुण ऐसे भी होते हैं जिनकी तुम सरहाना कर सकते हो, जैसे कि निडरता, लक्ष्य पाने का दृढ संकल्प और बलिदान। हालाकि ये कुछ तरीके हैं जिनके जरिए आतंकवाद का उपचार किया जा सकता है।
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हिंसा के समाधान के लिए सोच को सर्वव्यापी बनाना होगा
किसी ने प्रश्न किया, 'क्या यह जरूरी है कि आतंकवाद शारीरिक हिंसा के स्तर पर ही हो या फिर वह आधुनिक या सांस्कृत्कि हिंसा भी हो सकती है? इसका जवाब है, 'हां, आर्थिक हिंसा का समाधान है और वो ये कि इसके लिए हमें अपनी सोच को सर्वव्यापी बनाना होगा और स्थानीय चीजों को अपनाना होगा।