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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 24, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

विदेशों में भी पूज्य हैं विद्या की देवी सरस्वती

मां सरस्वती के जन्मदिवस को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है।

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Publish Date: Thu, 24 Sep 2015 04:52:20 PM (IST)Updated Date: Mon, 28 Sep 2015 11:16:04 AM (IST)
विदेशों में भी पूज्य हैं विद्या की देवी सरस्वती

मां सरस्वती हिंदूओं की प्रमुख देवी हैं। उन्हें संगीत, बुद्धि, विद्या और कला की देवी के रूप में पूजा जाता है। मां सरस्वती त्रिदेवियों में से एक हैं। उन्होंने ही वेदों में सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद की रचना की है।

मां सरस्वती के जन्म दिवस को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह जनवरी-फरवरी माह में आता है। इस दिन बच्चे हों या बडे़ सभी मां सरस्वती का पूजन /बुद्धि पाने के लिए पूरी श्रद्धा से करते हैं।


यह पर्व भारत के साथ दुनिया भर में मनाया जाता है। जहां मां सरस्वती को विद्या की देवी के रूप में पूजा जाता है। मां सरस्वती को जैन धर्म और कुछ बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग भी पूजते हैं।

मां सरस्वती विद्या, संगीत और कला की देवी हैं इसलिए इन्हें भारत के बाहर अन्य देशों जैसे जापान, वियतनाम, बाली (इंडोनेशिया) और म्यानमार के लोग भी मानते हैं।

म्यानमार: यहां विद्या की देवी सरस्वती को मानने वालों की संख्या बहुत अधिक है। 1084 ई. में बनाया गया एक मंदिर भी यहां मौजूद है। म्यानमार के बौद्ध कलाओं में देवी सरस्वती को 'थुरथदी' कहा जाता है। बौद्ध मुर्तियों में इनका स्वरूप देखा जा सकता है।

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जापान: भारत में विद्या की देवी सरस्वती का परिवर्तित रूप जापान में मिलता है। संभवतः 6वी-8वीं शताब्दी में यहां संगीत की देवी सरस्वती को पूजने का चलन शुरु हुआ। जापान के लोग अपने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की पूजा करते समय देवी सरस्वती का स्मरण करते हैं।

कंबोडिया : कंबोडिया के अंकोरवाट के मंदिरों में मां सरस्वती की प्रतिमा देखी जा सकती है। इससे यह सिद्ध होता है कि यहां भी सदियों पहले से देवी सरस्वती की पूजा होती आ रही है। कंबोडिया के यह मंदिर 7वी सदी के हैं। उस समय लिखे गए कई साहित्यकारों ने देवी सरस्वती को ब्रह्माजी की पत्नी बताया है। जिन्होंने देवी सरस्वती को 'वागेश्वरी' नाम से संबोधित किया है।

थाईलैंड : यहां के प्राचीन साहित्य से उल्लेख मिलता है देवी सरस्वती 'बोलने की शक्ति' देती हैं। थाईलैंड में वैसे तो बौद्ध धर्म काफी पल्लवित हैं। लेकिन देवी सरस्वती का स्वरूप उन्होंने भारत से ही लिया है। यहां सरस्वती को वो मोर पर विराजमान रूप में पूजते हैं।

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इंडोनेशिया : इंडोनेशिया यानी बाली में रहने वाले यहां के अप्रवासी भारतीयों कीप्रमुख देवी हैं सरस्वती। यहां के धार्मिक साहित्य में देवी सरस्वती का उल्लेख किया गया है। बाली में होने वाले रंगमंच और नृत्य कला में प्रवीण लोग अपनी कला प्रस्तुत करने से पहले मां सरस्वती की वंदना जरूर करते हैं।

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