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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 16, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Amarnath Dham: अमरनाथ धाम को कहा जाता है तीर्थों का तीर्थ, चंद्रमा के साथ घटता-बढ़ता है शिवलिंग का आकार

अमरनाथ धाम की यात्रा भारत की पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक है। अमरनाथ धाम कश्मीर में स्थित है, जिसकी यात्रा का मार्ग काफी कठिन है। हर साल आषाढ़ माह ...और पढ़ें

By Bharat MandhanyaEdited By: Bharat Mandhanya
Publish Date: Sun, 16 Jun 2024 11:42:54 AM (IST)Updated Date: Sun, 16 Jun 2024 01:15:05 PM (IST)
Amarnath Dham: अमरनाथ धाम को कहा जाता है तीर्थों का तीर्थ, चंद्रमा के साथ घटता-बढ़ता है शिवलिंग का आकार
अमरनाथ गुफा का रहस्‍य

HighLights

  1. इस बार 29 जून से शुरू हो रही अमरनाथ धाम
  2. आषाढ़ पूर्णिमा से रक्षाबंधन तक जारी रहती है अमरनाथ यात्रा
  3. प्राकृतिक हिम से हुआ है शिवलिंग का निर्माण

Amarnath Dham धर्म डेस्क, इंदौर। अमरनाथ धाम की वार्षिक यात्रा 29 जून से शुरू होगी और इसका समापन 19 अगस्त को होगा। अमरनाथ धाम हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थों में से एक है। अमरनाथ धाम को तीर्थों का तीर्थ भी कहा जाता है। अमरनाथ धाम भगवान शिव को समर्पित है। हर साल आषाढ़ माह की पूर्णिया से अमरनाथ धाम की यात्रा शुरू होती है और रक्षाबंधन तक यह यात्रा यात्रा जारी रहती है।

अमरनाथ धाम दक्षिण कश्मीर में 3888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार यही वह स्थान है, जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को ब्रह्मांड का रहस्य बताया था। इस दौरान दो कबूतरों ने भी इस कथा को सुन लिया था, जिससे वे भी अमर हो गए। माना जाता है कि वे दोनों कबूतर हर वर्ष सावन माह में इस पवित्र गुफा में देखे जा सकते हैं। अमर नाथ गुफा की लंबाई 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है। गुफा करीब 11 मीटर ऊंची है।


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यात्रा में आती है कई कठिनाई

अमरनाथ यात्रा कठिन माने जाने वाली यात्राओं में गिनी जाती है। यात्रा के दौरान कई उबड़-खाबड़ रास्ते पड़ते हैं, तो वहीं श्रद्धालुओं को इस दौरान बर्फबारी और बारिश का सामना तक करना पड़ता है। साथ ही कई बार बर्फीली हवाएं भी चलने लगती है। हालांकि, यह सब कठिनाइयां भी भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं ला पाती।

स्वयंभू हिमानी कहलाता है शिवलिंग

गुफा में शिवलिंग का निर्माण प्राकृतिक तरीके से हुआ है। शिवलिंग पर ऊपर से बर्फ की पानी की बूंदे टपकती है। प्राकृतिक बर्फ से निर्मित होने के कारण ही इस शिवलिंग को स्वयंभू हिमानी भी कहा जाता है। मान्‍यता है कि चंद्रमा के घटने बढ़ने के साथ ही शिवलिंग का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है, जबकि श्रावण माह की पूर्णिमा को यह शिवलिंग अपने पूर्ण आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता है।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'