• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • धर्म
  • कहते हैं

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 26, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

देवदूत पक्षी 'मलक ताउस' से मोर का ये है संबंध

यजीदी जिस पूजा-परंपरा में विश्वास करते हैं उसके मूल में 'मलक ताउस' का जिक्र है। दरअसल मलक ताउस एक मोर है।

By Edited By:
Publish Date: Thu, 26 Mar 2015 12:14:17 PM (IST)Updated Date: Mon, 30 Mar 2015 10:37:47 AM (IST)
देवदूत पक्षी 'मलक ताउस' से मोर का ये है संबंध

भारतीय मोर दक्षिण एशिया के देशी तीतर परिवार का एक बड़ा और चमकीले रंग का पक्षी है। मोर हजारों वर्ष से संसार के सबसे सुन्दर पक्षियों में गिना जाता है। मोर का वैज्ञानिक नाम 'पावो क्रिसटेटस' है। जिसकी जन्म स्थली भारत है।

देवदूत पक्षी 'मलक ताउस'

यजीदी जिस पूजा-परंपरा में विश्वास करते हैं उसके मूल में 'मलक ताउस' का जिक्र है। दरअसल मलक ताउस एक मोर है। यजीदी मलक ताउस देवदूत पक्षी मानते हैं। उनका मानना है कि वह उनकी इस संसार में रक्षा करता है।


यजीदियों का मानना है कि वे मलक ताउस का वरदान थे। लेकिन अपनी इसी मान्यता के कारण उन्हें इस्लाम और ईसाइयत में शैतान का उपासक कहा जाता है। यह मलक ताउस (मोर) ही है जिसके कारण मुस्लिम और ईसाई दोनों ही उन्हें अपना दुश्मन और शैतान का उपासक मानते हैं। इस्लाम धर्म में शिया हों या सुन्नी दोनों ही यजीदियों को अपना दुश्मन समझते हैं।

बाइबिल में मोर का उल्लेख

पवित्र पुस्तक बाइबिल के एक संदर्भ में राजा सुलैमान (I किंग, चैप्टर X 22 और 23) के स्वामित्व में मोर का उल्लेख है। मध्यकालीन समय में, यूरोप में शूरवीर 'मयूर की शपथ' लिया करते थे और अपने मुकुट को इसके पंखों से सजाते थे।

मोर पंख को विजयी योद्धाओं के साथ दफन किया जाता था और इस पक्षी के मांस से सांप के जहर और अन्य कई विकृतियों का इलाज किया जाता था। आयुर्वेद में इसके कई उपयोग को बताया गया है। कहा जाता है कि मोर के रहने से क्षेत्र सांपों से मुक्त रहता है।

चार्ल्स डार्विन ने उनके दोस्त आसा ग्रे को लिखा था कि 'जब भी मैं मोर के पंखों को टकटकी लगा कर देखता हूं, यह मुझे बीमार बनाता है !' वह असाधारण पूंछ के एक अनुकूल लाभ को देखने में असफल रहे थे जिसे वह केवल एक भार समझते थे। 1850 के दशक में एंग्लो इंडियन समझते थे कि सुबह मोर देखने का मतलब है दिनभर अच्छे लोगों और देवियों का आशीर्वाद उन पर बना रहेगा।

पढ़ें : जानिए कौन हैं इराक के यजीदी

जीवविज्ञान की दृष्टि में मोर

मोर भारत के अलावा नेपाल तथा श्रीलंका में भी पाया जाता है। मोर की लम्बाई लगभग 2 मीटर तथा मोरनी 0.9 मीटर लम्बी होती है। दोनों के सिर पर पंखेनुमा कलगी होती है जो बहुत सुन्दर लगती है। भारतीय मोर सबसे ज्यादा प्रचलित नस्ल है। यह एक बहुत ही सख्त नस्ल है जिस पर ठन्ड का बहुत कम प्रभाव पड़ता है। इस नस्ल के पंखों का रंग नीला-काला होता है ।

मोर का रंग हरा भी होता है जिसे हर मोर या पावो मयूटीकस( वैज्ञानिक नाम) जो कि वर्मा, थाईलैंड एवं इंडो चाईना में पाया जाता है यह एक बहुत संवेदशील नस्ल है जिस पर ठन्ड का प्रभाव देखा जा सकता है।