Astro News: आपने घर-परिवार में अक्सर यह बात सुनी होगी कि रास्ते में पड़ी हुई किसी भी प्रकार की चीज को छूना नहीं चाहिए। बड़े-बुजुर्ग रास्ते में पड़ी वस्तुओं को ठोकर न मारने की सलाह भी देते हैं। लेकिन कभी आपने विचार किया है ऐसा क्यों कहा जाता है ? दरअसल लोग अपने जीवन में आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए कई प्रकार के टोने-टोटके, तंत्र-मंत्र या प्रयोग करते हैं। इन्हीं में इस्तेमाल की गई वस्तुओं को रास्ते में फेंक दिया जाता है। ये वस्तुएं पूरी तरह से नकारात्मकता से भरी होती हैं। यदि आप उन्हें हाथ या पैर से स्पर्श कर लेते हैं तो उसकी वजह से आपको अनचाही समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जानिए ऐसे ही कुछ बातों के बारे में

रास्ते में पड़ा हुआ नींबू

यदि आपको रास्ते में नींबू-मिर्ची या लौंग-सिंदूर लगा हुआ नींबू दिखाई देता है तो भूलकर भी इसे पैर या हाथ से स्पर्श न करें। ऐसा नीबूं तांत्रिक क्रियाओं में इस्तेमाल जाता है। ये पूरी तरह से नेगेटिव एनर्जी से भरा होता है। यदि इसे स्पर्श करते हैं तो आप अपने घर बिन बुलाई नकारात्मक समस्या ले आएंगे।

रास्ते में पड़ी घोड़े की नाल और कील

भूत-प्रेत बधाओं को दूर करने के लिए घोड़े की नाल और कील का प्रयोग किया जाता है। इन्हें प्रयोग में लेने के बाद रास्ते में फेंक दिया जाता है। यदि आप इस वस्तुओं स्पर्श करते हैं तो किसी प्रेत बाधा में पड़ जाएंगे।

पूजा सामग्री या नारियल

पूजा में प्रयोग की गई सामग्री या भगवान को अर्पित किया गया नारिलय लोग लापरवाही के चलते रोड़ पर फेंक देते हैं। ऐसा करने से भगवान का अपमान होता है। ऐसी वस्तुओं को पैर से ठोकर मारने पर देवताओं का शाप लगता है और आपका सौभाग्य दुर्भाग्य में बदल जाता है।

मृत पशु

यदि आपको कभी भी रास्ते में पड़े हुए मृत पशु दिखाई दें तो उन्हें स्पर्श नहीं करना चाहिए। ऐसे मृत पशु वातावरण में नेगेटिविटी फैलाते हैं जो आपके लिए अशुभ हो सकती है।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'

Posted By: Kushagra Valuskar

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