Astrology News: शास्त्रों के अनुसार जब भी आप किसी मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए जाते हैं, तो दर्शन करने के बाद बाहर आकर कुछ देर मंदिर की सीढ़ी या ऑटले पर थोड़ी देर बैठना चाहिए। यह बहुत ही शुभ माना जाता है। जब भी कोई भक्त मंदिर जाता है, तो वह ईश्वर से घर, गाड़ी, पैसा, धन-दौलत और सुख-शांति की कामना करता हैं, लेकिन यह सब नहीं करना चाहिए। भगवान आपकी पात्रता के अनुसार यह सब आपको देते हैं। हां, लेकिन सुख-शांति और समृद्धि के लिए मंदिर में दर्शन के बाद सीढ़ियों पर बैठकर एक शलोक या प्रार्थना को जरूर कहना चाहिए। इस लेख में हम आपको उस श्लोक के बारे में बताएंगे।
भक्त जब भी मंदिर जाता है, तो उसे कुछ देर मंदिर की सीढ़ियों पर बैठना चाहिए। ये शुभ माना जाता है। शास्त्रों में मंदिर के शिख को देव विग्रह का मुख और सीढ़ियों को उनके चरण पादुका माना जाता है। मंदिर की सीढ़ियों में बैठकर भगवान का स्मरण करते हुए इस श्लोक को बोलना चाहिए।
जब भी भक्त मंदिर में दर्शन के लिए जाए तो उन्हें खुली आंखों से भगवान को निहारना चाहिए। उनके दर्शन करना चाहिए। अक्सर लोग मंदिर में आंखें बंद करके खड़े रहते हैं, जबकि वहां तो जाते ही भगवान के दर्शनों के लिए हैं।
श्लोक - अनायासेन मरणम्, बिना देन्येन जीवनम्। देहान्त तव सानिध्यम्, देहि मे परमेश्वरम्।।
अर्थ - हे प्रभु... बिना किसी कष्ट और तकलीफ के हमारी मृत्यु हो। हम कभी भी बीमार होकर बिस्तर पर पड़े-पड़े, कष्ट उठाकर मृत्यु को प्राप्त न हो चलते फिरते ही हमारे प्राण निकल जाएं।
अर्थ - बिना तकलीफ के हमारी मृत्यु हो। यानी हम बीमार होकर बिस्तर पर पड़े-पड़े, कष्ट उठाकर मृत्यु को प्राप्त न हो, बल्कि चलते-फिरते हमारे प्राण निकलें।
अर्थ- हे प्रभु... हमें किसी सहारे की जरुरत न पड़े न ही हम किसी पर निर्भर रहे। ऐसी कृपा बनाना की हम किसी सहारे के बिना जीवन व्यतित कर सके। ठाकुर जी की कृपा से बिना भीख के ही जीवन बसर हो सके।
अर्थ- हे ईश्वर... मेरी मृत्यु जब भी, तब आप मेरे सम्मुख हो। जैसे भीष्म पितामह की मृत्यु के समय स्वयं श्री कृष्ण उनके सम्मुख जाकर खड़े हो गए। उनके दर्शन करते हुए प्राण निकले ।
अर्थ- हे प्रभु... ऐसा वरदान देना।
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