
राजस्थान का गुलाबी शहर जयपुर में स्थित है 'मोती डुंगरी गणेश जी का मंदिर' और 'गढ़गणेश जी का मंदिर'। यह मंदिर काफी प्राचीन है। यह दोनों ही मंदिर विख्यात हैं। इन मंदिर में वास करते हैं विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश(बाप्पा)।
कहते हैं इस मंदिर में स्थित गणेश प्रतिमा जयपुर नरेश श्री माधोसिंह प्रथम की पटरानी अपने पीहर से लाई थीं। सेठ पल्लीवाल यह मूर्ति लेकर मावली उदयपुर से जयपुर आए थे और उन्हीं की देखरेख में मोती डूंगरी की तलहटी में गणेश जी का मन्दिर बनवाया गया। उस समय राजा श्री माधोसिंह जी स्वयं पूजा करने इसी मंदिर में आते थे।
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इस प्रतिमा की विशेषता है कि यह मूर्ति बांयी और व्रकाकार बनी हुई है। पहले यहां एक छोटा मंदिर था। इस मंदिर की स्थिति में सुधार होता गया और इस दौरान मंदिर में गर्भग्रह का निर्माण करवाया गया।
भक्त भेजते हैं पत्र
गणेश जी के इस मंदिर की एक और विशेष बात है और वो यह कि यहां देशभर से गणेश जी के नाम रोजाना सैकड़ों पत्र आते हैं। इन पत्रों में विशेष रूप से विवाह के निमंत्रण पत्र होते है। कई लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए ' मनोती' पत्र भी भेजते है।
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यहां आने वाले पत्रों को पुजारी स्वयं प्रतिमा के समक्ष पढ़कर सुनाते है और कामना करते है कि भक्तों की कामनाएं पूर्ण हों। मंदिर के पास शिव मन्दिर भी बना हुआ है। जहां भक्त गणेश जी के दर्शन के बाद शिव मंदिर में भी जाते है, इसी के सामने मां गौरी व पंचमुखी हनुमानजी का मंदिर भी है।