
एलियन एक रहस्य की तरह हैं। इन्हीं एलियन को आधार मानते हुए कई किताबें लिखीं गईं, कई हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्में भी बनाई गई हैं। लेकिन एलियन का जिक्र सदियों से होता रहा है।
वो यहां आए थे और वो एक बार फिर पृथ्वी पर दस्तक जरूर देंगे ? दुनिया भर में फैले लाखों लोगों को ऐसा ही कुछ मानना है कि हमारे ग्रह पर एलियन्स आते थे। लेकिन क्या वाकई में एलियन हमारी पृथ्वी पर फिर से आएंगे?
स्विटजरलैंड निवासी एरिक वॉन डेनिकन ने 1968 में आई अपनी किताब 'चैरियर्ट्स ऑफ द गॉड' में एलियन के बारे में प्राचीन पौराणिक मान्यताओं के कई रहस्य प्रकट किए थे। इस किताब के मुताबिक प्राचीन दुनिया में दूसरी दुनिया के बुद्धिजीवी जीव पृथ्वी पर आए थे, और उन्होंने इंसानों से संपर्क भी किया था।
किताब में बताया गया कि प्राचीन समय में एलियन आए थे इस बात का विश्व के तमाम धर्मों के प्राचीन धर्मग्रंथों और प्राचीन शिलालेख में मिलते हैं। हालांकि आम बुद्धिजीवियों ने एरिक के तमाम दावों को गुमराह करने वाला बताया। इस किताब में 238 सवाल हैं, जिनके उत्तर भी मौजूद हैं। जो इस बात की पुष्टि करते हैं कभी एलियन पृथ्वी पर आए थे।
बाइबिल धर्म और एलियन
बाइबिल में ईश्वर के जन्नत से नीचे उतरने की कहानी का उल्लेख है जिसमें ईश्वर के दूत एक आग उगलते पहाड़ पर बैठकर नीचे उतरे थे। किताब में कहा गया यह ईश्वर नहीं है। ईश्वर को आने-जाने के लिए किसी माध्यम की जरूरत नहीं है। फिर उन्होंने बुक ऑफ ईनाक पढ़ी ('बुक ऑफ ईनाक' को बाइबिल से अलग कर दिया था।
आज भी कई ईसाई धर्मशास्त्री इस बुक को विवादास्पद मानते हैं।) ईनाक की किताब के अनुसार, 'ईश्वर ने ईनाक को आग उलगलते हुए रथ में निकाल दिया था उस समय धार्मिक मत कहते है जन्नत भेज दिया था ईनाक को स्पेसशिप थी।'
बुक ऑफ ईनाक में उल्लेख मिलता है कि, 'आसमान के रखवाले धरती पर उतरे थे उन्हें एंजेल्स का नाम दिया गया वो इंसानों के साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहते थे।
जाहिर है उनके बच्चे विशाल थे। इस तरह एलियन्स और इंसानों के सेक्सुअल कॉन्टेक्ट की बातें भी मिलती हैं। ऐसा संभव है हम भी उसी एलियन प्रजाति की नस्ले हैं। होमोसेंपियन का इतिहास लगभग ढाई लाख सालों तक फैला हुआ है।'
हिंदू धर्म और एलियन
हिंदू धर्म के प्राचीन वेदों के अनुसार प्राचीन हिंदू देवता उड़ने वाले रथों में बैठकर आसमान से उतरते थे, और वो उन रथों को विमान कहते थे। ये कैसे उड़ते थे इस बारे में विस्तृत उल्लेख प्राचीन हिंदू ग्रंथों में मिलता है।
दरअसल ये सिद्ध हो चुका है कि यह प्राचीन विमान नट बोल्ट से बने उड़ने वाली उड़न तश्तरियों की तरह थे। भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जिनका रूप प्राचीन विमान से मिलता है जैसे हम्पी का मंदिर तिरुमाला स्थित भगवान तिरुपति मंदिर। हिंदू मंदिर का ऊपरी हिस्सा प्राचीन विमान की तरह होता है।
सबसे रोचक बात यह है कि भरतीय पौराणिक ग्रंथ जिनमें आसमान में हुई प्राचीन लड़ाइयों का जिक्र हुआ है। दरअसल हम उसी प्राचीन खोज में जुटे हैं जिसकी हमे पहले जानकारी थी।
हिंदू धर्म ग्रंथों में हवा में उड़ने वाले प्राचीन विशाल प्राणियों की, उड़ने वाले घोड़े, किताब कहती है कि पहले देवता एयर क्राफ्ट में बैठते थे और फिर उड़ जाया करते थे।