इस संहिता में है देवी पार्वती के अद्भुत चरित्र का चित्रण
जिसमें परब्रह्म परमेश्वर के शिव स्वरूप का तात्विक, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्ण है।
By
Edited By:
Publish Date: Fri, 20 Mar 2015 04:01:17 PM (IST)
Updated Date: Tue, 24 Mar 2015 09:35:58 AM (IST)

शिवपुराण प्रमुख और सुप्रसिद्ध पुराण है। जिसमें परब्रह्म परमेश्वर के शिव स्वरूप का तात्विक, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्ण है। शिवपुराण में सात संहिताओं का उल्लेख है। जोकि क्रमशः विद्येश्वर संहिता, रूद्र संहिता, शतरूढ़ संहिता, कोटिरूद्र संहिता, उमा संहिता, उमा संहिता, कैलाश संहिता, वायवीय संहिता। इनमें पांचवी संहिता है 'उमा संहिता'।
उमा संहिता में देवी पार्वती के अद्भुत चरित्र तथा उनसे संबंधित लीलाओं का वर्णन किया गया है। माता पार्वती भगवान शिव के आधे भाग से प्रकट हुई है। वह भगवान शिव का आंशिक स्वरूप हैं। इसलिए इस संहिता में उमा- महिमा का वर्णन अप्रत्यक्ष रूप से भगवान शिव के ही अर्धनारीश्वर स्वरूप के बारे में बताया गया है।
उमा संहित का आरंभ में शिव-शिवा द्वारा श्रीकृष्ण को अभीष्ट वर देने की कथा है। इसके बाद यमलोक यात्रा, एक सौ चालीस नरकों, नरकों में गिरने वाले पापों, और उसके बाद मिलने वाली नरक यातनाओं का वर्णन कर मृत्यु के बाद के गूढ़ रहस्यों के बारे में बताया गया है।
वेद और पुराणों के स्वाध्याय, विविध प्रकार के दानों की महिमा, मृत्यु के लक्ष्णों , काल को जीतने के उपाय और विभिन्न प्रकार की सिद्धियों साधनाओं की महिमा के वर्णन से इस पुराण का सूक्ष्म और मूल तत्वज्ञान का वर्णन किया गया है।
तत्वज्ञान के अतिरिक्त इस संहिता में भगवती उमा के कालिका, महालक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा, शताक्षी, शाकम्भरी, भ्रामरी, आदि लीलावतारों का वर्णन करके उनके द्वारा महिषासुर, मधु-कैटभ, शुंभ-निशुम्भ, रक्तबीज आदि भयंकर महापराक्रमी दैत्यों के संहार की कथाओं का वर्णन विस्तार से मिलता है।