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एमपी के शहडोल में डायन माता धाम, लाल कपड़ों में बंधे हैं हजारों नारियल, कोई संतान तो कोई खोया सामान मांगने आता है

यहां श्रद्धालु मन्नत लेकर आते हैं और नारियल को लाल कपड़े में बांधकर परिसर में टांग देते हैं। संतान प्राप्ति, पढ़ाई में सफलता, खोए पशु और चोरी गया सामा...और पढ़ें

By Vinod ShuklaEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 07:42:05 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 07:43:28 PM (IST)
एमपी के शहडोल में डायन माता धाम, लाल कपड़ों में बंधे हैं हजारों नारियल, कोई संतान तो कोई खोया सामान मांगने आता है
शहडोल का डायन माता धाम।

HighLights

  1. बरगद के पेड़ से शुरू हुई 40 साल पुरानी कथा
  2. चैत्र-शारदीय नवरात्र में उमड़ते हैं श्रद्धालु,
  3. हनुमान जी हैं मंदिर समिति के अध्यक्ष

नईदुनिया प्रतिनिधि, शहडोल। जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर बुढ़ार जनपद के ग्राम भैंसाताल में जंगल के बीच स्थित है डायन माता धाम। अनोखा नाम, रहस्यमय लोककथा और लाल कपड़ों में बंधे हजारों नारियल इस धाम की पहचान हैं। स्थानीय मान्यता में इसे खूनी माता के नाम से भी पूजा जाता है।

बुजुर्गों के अनुसार करीब चार दशक पहले यहां घना जंगल था। ग्रामीण पशुओं को चरने जंगल छोड़ते तो कई पशु लौटते नहीं थे। परेशान होकर लोगों ने एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे पशुओं की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। यहीं से आस्था बढ़ी और यह स्थान डायन माता धाम बन गया।


यहां श्रद्धालु मन्नत लेकर आते हैं और नारियल को लाल कपड़े में बांधकर परिसर में टांग देते हैं। संतान प्राप्ति, पढ़ाई में सफलता, खोए पशु और चोरी गया सामान मिलने की कामना लेकर लोग पहुंचते हैं। मन्नत पूरी होने पर नारियल खोलकर पूजा, भंडारा करते हैं।

चैत्र और शारदीय नवरात्र में शहडोल-अनूपपुर से हजारों श्रद्धालु आते हैं। स्थानीय परंपरा में कुछ लोग बकरे-मुर्गे की बलि भी चढ़ाते हैं।

लोककथा के अनुसार जमीन पर कब्जे और आदिवासी समुदाय पर कथित अत्याचारों के दौर में समिति बनी। डायन माता को संरक्षक और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें अध्यक्ष माना गया। आज यह धाम लोकविश्वास और आदिवासी परंपरा का प्रतीक बन गया है।