
इन दिनों अरुण जेटली और अरविंद केजरीवाल का मानहानि मामला काफी चर्चा में बना हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही राजनीतिक नेता मेष राशि से हैं।
ऐसा नहीं कि आधुनिक युग में संभ्रांत लोग एक दूसरे पर मानहानि करते हैं। बल्कि यह रीत सदियों से चली रही है। महाभारत में उल्लेख मिलता है कि युधिष्ठिर द्वारा कराए गए राजसूय यज्ञ में जब शिशुपाल ने श्रीकृष्ण को 100 अपशब्द कहकर अपमानित किया तो भगवान शिशुपाल का सिर अपने सुदर्शन चक्र से अलग कर दिया था।
ठीक इसी तरह जब ऋषि दुर्वासा का यदि कोई अपमान करता तो वह श्राप देकर उसे दंडित किया करते थे। ऐसे कई उदाहरण हैं जो बताते हैं कि प्राचीन काल में भी मानहानि हुआ करती थी।
द्वापरयुग में जब दुर्योधन को द्रोपदी ने अंधे का पुत्र अंधा कहा जब दुर्योधन ने स्वयं को काफी अपमानित महसूस किया था। जिसका परिणाम महाभारत युद्ध में उसकी जिंदगी के अंत से खत्म हुआ।
क्या कहता है वर्तमान कानून
भारतीय दंड संहिता के अनुसार मानहानि: मानहानि दो रूपों में हो सकती है लिखित रूप में या मौखिक रूप में। यदि किसी के विरुद्ध प्रकाशित रूप में या लिखित रूप में झूठा आरोप लगाया जाता है या उसका अपमान किया जाता है तो यह 'अपलेख' कहलाता है।
जब किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई अपमानजनक कथन या भाषण किया जाता है। जिसे सुनकर लोगों के मन में व्यक्ति विशेष के प्रति घृणा या अपमान उत्पन्न हो तो वह 'अपवचन' कहलाता है।
मानहानि करने वाले व्यक्ति पर दीवानी और फौजदारी मुकदमे चलाए जा सकते हैं। जिसमें दो वर्ष की साधारण कैद अथवा जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।