• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • धर्म
  • कहते हैं

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 10, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नहीं हो रहा था गणेशजी का विवाह, फिर आजमाई यह युक्ति

इसलिए उनसे कोई भी सुशील कन्या विवाह के लिए राजी नहीं होती थी।

By Edited By:
Publish Date: Thu, 10 Sep 2015 04:10:49 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2015 06:05:04 PM (IST)
नहीं हो रहा था गणेशजी का विवाह, फिर आजमाई यह युक्ति

पहले गणेशजी का चेहरा भी मनुष्य के चेहरे की तरह था। लेकिन एक बार भगवान शिव जब माता पार्वती से मिलने पहुंचे तो गणेशजी ने उन्हें नहीं जाने दिया तब शंकरजी ने गणेश जी का सिर त्रिशूल से अलग कर दिया था।

इसके बाद गणेशजी के सिर में हाथी का सिर जोड़ा गया। हाथी के सिर की सुंदरता बढ़ाने वाले उनके दो दांत भी थे। लेकिन परशुराम के साथ युद्ध में गणेशजी का एक दंत भी टूट गया। और वो एकदंत कहलाए। उनका शरीर भी बड़ा था।


इसलिए उनसे कोई भी सुशील कन्या विवाह के लिए राजी नहीं होती थी। गणेशजी इस बात से नाराज थे। उन्होंने कहा, 'अगर मेरा विवाह नहीं हो रहा तो मैं किसी ओर का विवाह भी नहीं होने दूंगा।'

पढ़ें:भगवान शिव-पार्वती की हैं एक पुत्री

उन्होंने अपने चूहे को आदेश दिया कि जिस रास्ते से किसी भी देवता की बारात गुजरे उस रास्ते को और विवाह मंडप की भूमि को अंदर से खोखला कर विघ्न डालो। चूहे ने गणेशजी के कहने पर वैसा ही किया। सारे देवता परेशान हो गए। शिवजी को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था देवी पार्वती ने सलाह दी ब्रह्माजी से इस सममस्या का हल निकाला जाए।

तब ब्रह्माजी योग में लीन हुए और योग से ही दो कन्याएं ऋद्धि और सिद्धि अवतरित हुईं। दोनों ब्रह्माजी की मानस पुत्री थीं। उन दोनों को लेकर ब्रह्माजी गणेशजी के पास पहुंचे और कहा वह उन्हें शिक्षा दें। गणेशजी तैयार हो गये। जब भी चूहा गणेशजी के पास किसी के विवाह की सूचना लाता तो ऋद्धि और सिद्धि ध्यान बांटने के लिए कोई न कोई प्रसंग छेड़ देतीं।

इस तरह विवाह निर्विघ्न होने लगे। एक दिन चूहा आया और उसने देवताओं के निर्विघ्न विवाह के बारे में बताया तब गणेश जी को सारा मामला समझ में आया।

गणेशजी के क्रोधित होने से पहले ब्रह्माजी उनके पास ऋद्धि सिद्धि को लेकर प्रकट हुए। उन्होंने कहा, आपने स्वयं इन्हें शिक्षा दी है। मुझे इनके लिए कोई योग्य वर नहीं मिल रहा है। आप इनसे विवाह कर लें।

इस तरह ऋद्धि(बुद्धि- विवेक की देवी) और सिद्धि (सफलता की देवी) से गणेशजी का विवाह हो गया। और फिर बाद में गणेश जी के शुभ और लाभ दो पुत्र भी हुए।