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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 10, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हनुमानजी हैं ब्रह्मचारी लेकिन मकरध्वज था उनका पुत्र

वर्तमान में मकरध्वज के मंदिर भी मौजूद हैं। जहां मकरध्वज की पूजा की जाती है।

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Publish Date: Thu, 10 Dec 2015 04:51:22 PM (IST)Updated Date: Mon, 14 Dec 2015 10:15:03 AM (IST)
हनुमानजी हैं ब्रह्मचारी लेकिन मकरध्वज था उनका पुत्र
दांडी हनुमान मंदिर, भेंटद्वारिका (गुजराज).

हिंदू पौराणिक ग्रंथों में भगवान श्रीराम के परमभक्त हनुमानजी को ब्रह्चारी बताया गया है। हनुमानजी, भगवान शिव के ग्यारवें रुद्र अवतार हैं। लेकिन यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि हनुमानजी का एक पुत्र भी था जिसका नाम था 'मकरध्वज'।

मकरध्वज, का जन्म मछली के गर्भ से हुआ था। वह हनुमानजी के तरह ही बलशाली था। जिसे अहिरावण ने पाताल लोक का द्वारपाल नियुक्त किया था। मकरध्वज, हनुमानजी का पुत्र था इस बात का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में मिलता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, 'जब हनुमानजी लंका दहन कर रहे थे, तब आग की तपिश के कारण हनुमानजी को उन्हें बहुत पसीना आ रहा था।


इसलिए लंका दहन के बाद जब उन्होंने अपनी पूंछ में लगी आग बुझाने के लिए समुद्र में छलांग लगाई। तब उनके शरीर से पसीने की एक बड़ी-सी बूंद समुद्र में गिर गई। उस समय एक बड़ी मछली ने भोजन समझ वह बूंद निगल ली। उसके उदर में जाकर वह बूंद एक शरीर में बदल गई।

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एक दिन पाताल के असुरराज अहिरावण के सेवकों ने उस मछली को पकड़ लिया। जब वे उसका पेट चीर रहे थे तो उसमें से वानर की आकृति का एक मनुष्य निकला। वे उसे अहिरावण के पास ले गए। अहिरावण ने उसे पातालपुरी का रक्षक नियुक्त कर दिया। यही वानर हनुमान पुत्र 'मकरध्वज' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

द्वारपाल से बना पाताल अधिपति

जब अहिरावण श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण कर देवी के सामने बलि चढ़ाने के लिए पाताल लोक में लाया। तब श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराने के लिए हनुमानजी पाताल लोक पहुंचे और वहां उनकी भेंट मकरध्वज से हुई।

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इसके बाद मकरध्वज ने अपनी जन्म की कथा हनुमानजी को सुनाई। हनुमानजी ने अहिरावण का वध कर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराया और द्वारपाल मकरध्वज को पाताल लोक का अधिपति नियुक्त करते हुए उसे धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

यहां है मकरध्वज का मंदिर

वर्तमान में मकरध्वज के मंदिर भी मौजूद हैं। जहां मकरध्वज की पूजा की जाती है। भारत में मकरध्वज के दो मंदिर हैं। हनुमानजी और मकरध्वज का मंदिर गुजरात के भेंटद्वारिका में स्थित है। इस मंदिर को दांडी हनुमान मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं यहां पहली बार हनुमानजी, मकरध्वज से मिले थे। यह मंदिर काफी प्राचीन है।

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मकरध्वज का एक और प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के अजमेर से जोधपुर मार्ग में स्थित है। यहां भी मकरध्वज के साथ हनुमानजी की पूजा की जाती है। यहां शारीरिक और मानसिक रोगों का इलाज भी किया जाता है।

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