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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 02, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

यहां पत्थरों से निकलते हैं सात स्वर

यहां प्रवेश करते ही, मन को शांति मिलती है। वह इसलिए क्योंकि यहां साक्षात् ईश्वर का वास होता है।

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Publish Date: Sat, 02 May 2015 04:33:45 PM (IST)Updated Date: Tue, 05 May 2015 03:05:15 PM (IST)
यहां पत्थरों से निकलते हैं सात स्वर

मंदिर जिसे हम देवालय भी कहते हैं। यहां प्रवेश करते ही, मन को शांति मिलती है। वह इसलिए क्योंकि यहां साक्षात् ईश्वर का वास होता है। यहां महकने वाले धूप- चंदन की महक मन शांति को और भी दुगना कर देती है, क्योंकि ये सभी आस्था के सूचक होते हैं।

लेकिन हिंदू मंदिरों में एक और चीज होती है जिसे देखने भर से मन, आस्था की गंगा प्रवाहित होने लगती है। हमारे देश में ऐसे कई मंदिर है जो दुर्लभ स्थापत्य कला के नायाब उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

दक्षिण भारत में विजयनगर साम्राज्य के काल में बना 'विट्ठल मंदिर' बेहतरीन शिल्पकला और स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। इस मंदिर में एक संगीत खंड है।

इसमें प्रवेश करते ही सबसे पहले सात स्तंभ हैं। इसके प्रथम स्तंभ में कान लगाएं तो और उस पर किसी भारी वस्तु से धीरे से प्रहार करें तो 'स' की ध्वनि निकलती है।

पढ़ें : भगवान गौतम बुद्ध के 10 अमूल्य वचन

यदि आगे की स्तंभों पर यही प्रक्रिया करते हैं तो संगीत के साथ स्वर यानी 'रे, ग, म, प, ध, नी' की ध्वनियां निकलती हैं। पत्थर से बने सात स्तंभ से सात स्वरों की ध्वनियां निकलना भी स्थापत्य कला की एक मिसाल है। यहां ऐसे कई स्तंभ हैं जिन पर तबले, बांसुरी, वीणा और कई तरह की ध्वनियां उत्पन्न होती हैं।


मुस्कान बिखेरती पत्थर की प्रतिमा

महाराष्ट्र स्थित अजंता की गुफा में भगवान गौतम बुद्ध की एक ऐसी प्रतिमा है। जो वाकई में दुर्लभ है। यह प्रतिमा यदि आप बायीं ओर से देखें तो बुद्ध गहरे ध्यान में दिखाई देते हैं और यदि आप दाईं तरफ से देखें तो बुद्ध के मुखमंडल पर रहस्यमयी हास्य के भाव दिखाई देते हैं। यानी एक मूर्ति को अलग-अलग कोण से देखने पर इस मूर्ति का भाव बदल जाता है। यह उस समय के स्थापत्य का नायाब उदाहरण है।

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दक्षिण भारत स्थित मदुरई का मीनाक्षी मंदिर अपनी स्थापत्य कला के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इसकी ऊंचाई 852 फुट और इसके परकोटे ( मंदिर के आस-पास की दीवार) में 9 गोपुर (गुंबद) हैं। प्रत्येक स्तंभ पर मूर्तियां कई आकृतियों में बनी हुई हैं।

मंदिरों में स्थापत्य की नायाब कलाकृतियां

ओडीशा में स्थित कोणार्क के सूर्य मंदिर का निर्माम लगातार 12 वर्षों तक चला और फिर जब मंदिर बना तो यहां का स्थापत्य देखने लायक बन गया जो आज भी अपने इतिहास को बयां करता है।

महाराष्ट्र स्थित एलोरा के मंदिर जिनमें ब्राह्मण मंदिर काफी विशाल और सुंदर है। इसकी लंबाई 142 फुट, चौड़ाई 62 फुट और ऊंचाई 100 फुट है। इन सभी पर पौराणिक दृश्य बनाए गए हैं। यहीं से एलीफेंटा की गुफा में शिव-पार्वती के विवाह का दृश्य बनाए गए हैं।

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मध्यप्रदेश में स्थित खजुराहो के मंदिर नवी शताब्दी में बनाए गए। यहां पहले 85 मंदिर थे लेकिन अब 20 ही बचे हुए हैं। खजुराहो के मंदिर शिल्पकला के महान प्रतीक हैं।

गुजरात में स्थित गिरनार के मंदिर प्रसिद्ध हैं। ठीक इसी तरह दक्षिण भारत में श्रीरंगपट्टन मंदिर भी स्थापत्य का बेहतरीन मिसाल है।