यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 08, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जानिए कैसे स्वभाव की थीं श्रीराम और रावण की माता
कहते हैं 'मां' पुत्र की पहली गुरु होती हैं। बालक के महान बनने में मां का अविस्मरणीय योगदान रहता है।
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Publish Date: Tue, 08 Sep 2015 04:36:58 PM (IST)Updated Date: Wed, 09 Sep 2015 02:26:03 PM (IST)

कहते हैं 'मां' पुत्र की पहली गुरु होती हैं। बालक के महान बनने में मां का अविस्मरणीय योगदान रहता है। भगवान श्रीराम और त्रेतायुग के अहंकारी विद्वान की माता के बारे में वाल्मीकि रामायण से कुछ रोचक जानकारी...
श्रीराम की मां कौशल्या
- माता कौशल्या कोसल देश के राजा भानुमान की पुत्री और अयोध्या के राजा दशरथ की पटरानी थीं।
- इन्हें अपने मायके से स्त्री धन के रूप में एक हजार गांव मिले थे।
- राजा दशरथ की एक अन्य रानी कैकेयी इन पर हमेशा व्यंग्यबाण चलाया करती थीं। लेकिन कौशल्या ने हमेशा कैकेयी के साथ बहन जैसा बर्ताब किया।
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- अपने पुत्र श्रीराम के राज्याभिषेक होने की वार्ता से माता कौशल्या जितनी प्रसन्न हुईं थीं, उनके वन गमन जाने का समाचार सुनकर शोक से टूट गईं थीं।
- माता कौशल्या स्वभाव से मृदु थीं, लेकिन अत्यंत उदास रहा करती थीं।
रावण की माता कैकशी
- यह सुमाली दानव की पुत्री थीं और विश्रवा ऋषि की पत्नी थीं।
- कैकसी के बारे में कहते हैं कि जब कोई उनसे विवाह करने की इच्छा जाहिर करता सुमाली उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर देते थे। ऐसे में कैकसी की उम्र बढ़ती गई तब उन्होंने पिता की आज्ञा से ही ऋषि विश्रवा का वरण किया।
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- ऋषि विश्ववा ने कैकसी को बताया कि विवाह के बाद क्रूर रक्षसों को जन्म देंगी। लेकिन उनका आखिरी पुत्र कुलदीपक और धर्मात्मा होगा।
- कैकसी के तीन पुत्र एक पुत्री थीं। जोकि क्रमशः रावण,कुंभकर्ण, शूर्पणखा(पुत्री) और विभीषण को जन्म दिया।