• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • धर्म
  • कहते हैं

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 22, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

यहां है पुण्य प्रदान करने वाली गोदावरी नदी का जन्मस्थल

भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और वह पाप मुक्त हुए।

By Edited By:
Publish Date: Wed, 22 Jul 2015 04:52:40 PM (IST)Updated Date: Thu, 23 Jul 2015 09:08:36 AM (IST)
यहां है पुण्य प्रदान करने वाली गोदावरी नदी का जन्मस्थल

पतित पावन गोदावरी नदी के तट नासिक में इन दिनों महाकुंभ जारी है। मान्यता है महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालु गोदावरी नदी में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करते हैं, वहीं गोदावरी नदी भी लोगों के पापों को मुक्त कर धरती पर पुण्यता का जल प्रवाहित करती है।

लेकिन यह प्रश्न उठना लाजिमी है कि पापों को पुण्य में बदलने वाली गोदावरी नदी का उद्गम स्थल कहां है? दरअसल इस पवित्र नदी का उद्गम स्थल नासिक से पहले चक्रतीर्थ नामक एक कुंड है, यहीं से गोदावरी एक नदी के रूप में बहती नजर आती है। इसलिए अमूमन लोग चक्रतीर्थ को ही गोदावरी का प्रत्यक्ष उद्गम मानते हैं। गोदावरी नदी को दक्षिण भारत की गंगा कहा जाता है।


पढ़ें: सदियों पहले ऐसा था श्री वेंकटेश्वर भगवान का श्री मंदिर

नासिक से 35 किमी दूर त्रयंबक छोटे शहर में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग भी गोदावरी के तट पर है। त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग ब्रह्मगिरी नामक पहाड़ी की तलहटी में स्थित है। ब्रह्मगिरी को शिव का ही रूप माना जाता है। यही गोदावरी का मूल उद्गम स्थल है।

कहते हैं कि गौतम ऋषि ही ब्रह्मगिरी पर गंगा नदी को लेकर आए थे, जो गौतमी या गोदावरी के नाम से जानी जाती है। एक बार उनके आश्रम में ऋषियों के छल से उन पर गो-हत्या का अपराध लग गया, जिसके प्रायश्चित के लिए उन्होंने ब्रह्मगिरी पर्वत पर भगवान शंकर का घोर तप किया। भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और वह पाप मुक्त हुए। गौतम मुनि की प्रार्थना पर भगवान शंकर ब्रह्मगिरी की तलहटी में त्रयंबकेश्वर के रूप में प्रतिष्ठित हो गए।

पढ़ें: हनुमानजी हमेशा रहते हैं ऐसे लोगों के साथ

मान्यता है कि यहां स्थित कुशावर्त तीर्थ में गोदावरी नदी में एक डुबकी लगाने से अनेक जन्मों के पाप क्षय हो जाते हैं। त्रयंबकेश्वर महादेव मंदिर के सामने गोदावरी में अहिल्या नदी का संगम होता है। त्रयंबकेश्वर के बाद और नासिक से पहले चक्रतीर्थ नामक एक कुंड है, यहीं से गोदावरी एक नदी के रूप में बहती नजर आती है। इसलिए बहुत से लोग चक्रतीर्थ को ही गोदावरी का प्रत्यक्ष उद्गम मानते हैं।