• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • दिवाली पूजन 2026
  • होम
  • धर्म
  • कहते हैं

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 10, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

यदि विभीषण की ये बात मान लेता रावण तो नहीं होता श्रीराम- रावण युद्ध

त्रैतायुग में जब रावण ने सीता का अपहरण कर लिया तब श्रीराम की सेना रावण पर चढ़ाई कर रही थी।

By Edited By:
Publish Date: Thu, 10 Sep 2015 09:42:48 AM (IST)Updated Date: Thu, 10 Sep 2015 05:18:28 PM (IST)
यदि विभीषण की ये बात मान लेता रावण तो नहीं होता श्रीराम- रावण युद्ध

त्रैतायुग में जब रावण ने सीता का अपहरण कर लिया तब श्रीराम की सेना रावण पर चढ़ाई कर रही थी। ऐसे समय में लंकापति के छोटे भाई विभीषण किसी भी तरह रावण के विचारों में परिवर्तन लाकर उसे बचाना चाहते थे।

विभीषण रावण के पास पहुंचे। रावण की लंका में उसका स्वर्ण भवन मूल्यवान रत्नों से सुसज्जित था। वहां वेदों का पाठ हो रहा था। वाद्यवृंन्दों के साथ गायक प्रभाती गा रहे थे। ऐसे वातावरण में विभीषण रावण के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए।


उन्होंने रावण से कहा, 'जब से आप श्रीराम की पत्नी सीता को यहां लाए हैं। जब से लंका में अपशकुन हो रहे हैं। आप सीता को उनके घर सुरक्षित पहुंचा दीजिए ऐसा करने पर लंका बच सकती है।'

रावण ने कहा, 'यह कभी नहीं हो सकता। तुम जा सकते हो। लेकिन विभीषण की यह बातें सुनकर रावण के मन अशांत हो गया। दूसरे दिन उसने मंत्रीपरिषद को बुलाया।

पढ़ें:जानिए कैसे स्वभाव की थीं श्रीराम और रावण की माता

वह अपनी कामवासना और क्रोध को काबू में नहीं कर पा रहा था। इस बात का उल्लेख रावण ने स्वयं किया है। इसलिए वह अपने मंत्रियों से बार-बार सलाह लेता गया, उससे उसे कुछ शांति का अनुभव मिला।'

दूसरे दिन जब रावण राजसभा में पहुंचा तो उसने विभीषण और अपने सभी मंत्रियों से कहा, 'आप सभी जानते हैं कि मैं सीता को नहीं लौटा सकता। न ही सीता के प्रति अपनी भावनाएं बदल सकता हूं।

पढ़ें:इन्होंने की मूर्खता, श्रीहरि को लेना पड़ा धरती पर अवतार

सीता ने मुझसे एक साल की अवधि मांगी है। में इंतजार कर रहा हूं। में इस बारे में हार मानने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हूं।'

एक क्लिक पर पढ़ें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की लेटेस्ट खबरें। Hindi News पढ़ें। MP News, Chhattisgarh news, आज का राशिफल और आज का मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पढ़ें।