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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 18, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

देश का पहला 'रॉक थीम पार्क' और जटायु

दक्षिण केरल में एक हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित छद्यमंगलम पर देश का पहला 'रॉक थीम पार्क' बनाया जाएगा।

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Publish Date: Fri, 18 Dec 2015 05:20:19 PM (IST)Updated Date: Sat, 19 Dec 2015 06:02:02 PM (IST)
देश का पहला 'रॉक थीम पार्क' और जटायु

दक्षिण केरल में एक हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित छद्यमंगलम पर देश का पहला 'रॉक थीम पार्क' बनाया जाएगा। यह पार्क रामायण के पात्र जटायु की थीम पर आधारित होगा। मान्यताओं को मानें तो केरल के कोल्लम जिले में स्थित जटायु शिला वह स्थान है, जहां जटायु जी ने सीता को हरण कर ले जाते रावण को रोकने की कोशिश की थी।

दरअसल त्रेतायुग में लंकापति रावण जब श्रीराम की पत्नी माता सीता का हरण कर ले जा रहा था तब जटायु ने रावण का रोकना चाहा, इस दरम्यान रावण ने अपने चन्द्रहास खड़ग से जटायु जी का एक पंख काट दिया था और वह धरती पर गिर गए। यह स्थान केरल की राजधानी तिरुअनन्तपुरम से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।


कौन थे जटायु

जटायु रामायण के एक पात्र हैं। वह अरुण देव के पुत्र थे। उनके बड़े भाई का नाम सम्पाती था। जटायु ने ही श्रीराम को बताया था कि रावण सीता का हरण करके लंका ले गया है और बाद में जटायु ने जटायु ने अपने प्राण त्याग दिए। श्रीराम और उनके अनुज लक्ष्मण ने जटायु जी का अंतिम संस्कार, पिंडदान और जलदान किया था।

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जटायु के पिता थे सूर्य के सारथी

प्राचीन काल में प्रजापति कश्यप थे उनकी पत्नी का नाम विनता और उनके दो पुत्र थे नाम था 'गरुड़' और 'अरुण'। गरुण भगवान विष्णु के वाहन थे तो अरुण सूर्य के रथ के सारथी। अरुण देव के ही पुत्र थे 'सम्पाती' और 'जटायु'। एक बार बचपन में सम्पाती और जटायु ने सूर्य मंडल के लिए उड़ान भरी।

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सूर्य का तेज अधिक था, तो जटायु तो बीच रास्ते में से ही लौट आए लेकिन सम्पाती उड़ते गए। वह सूर्य का ताप सहन न कर सके और उनके पंख जल गए। वे समुद्र में गिरे और चेतना शून्य हो गए। तब चंद्रमा ने उनका उपचार किया और वरदान दिया कि सीता जी की खोज करने वाले वानरों के दर्शन मात्र से उनके पंख ठीक हो जाएंगे।

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