
रामकृष्ण मुले, इंदौर। ISKCON Temple Indore: पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर शहर के इस्कान स्थित राधा-गोविंद मंदिर में 22 जून को स्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ के दर्शन 15 दिन नहीं होंगे। 108 कलशों से भक्तों द्वारा भगवान को कराए जाने वाले सहस्त्र स्नान के बाद जगत के पालनहार खुद बीमार पड़ जाएंगे। इसके चलते 15 दिनों के लिए मंदिर के पठ बंद रहेंगे और भगवान विश्राम की मुद्रा में रहेंगे। उनके विश्राम में किसी तरह का खलल ने पढ़े इसलिए घंटे-घड़ियाल और शंख ध्वनि भी नहीं की जाएगी।
इस्कान इंदौर के अध्यक्ष महामनदास प्रभु बताते है कि जगन्नाथपुरी की तरह सभी विधि-विधान इंदौर सहित देश-दुनिया के सभी इस्कान के मंदिर में होंगे। भगवान जल्दी स्वस्थ हो इसके लिए उनका विशेष ध्यान रखा जाएगा। उन्हें जड़ी-बूटियों से बनी औषधियों का भोग लगाया जाएगा।
मेवे मिष्ठान की जगह भोजन में उबली हुई सब्जियां और खिचड़ी आदि के अलावा काढ़ा और फलों का रस प्रदान किया जाएगा। इस दौरान प्रतिदिन विग्रह शीतल लेप भी लगाया जाता है। अच्युत गोपाल प्रभु बताते है कि इसके बाद आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन 7 जुलाई को स्वस्थ होंगे। इस दिन रथयात्रा निकाली जाएगी जो शहरभर भ्रमण करेंगे जिसमें हजारों भक्त शामिल होंगे।
अंतर्राष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संघ (इस्कान) के निपानिया स्थित राधा गोविंद मंदिर की जगन्नाथ पुरी तर्ज पर रथयात्रा का 7 जुलाई को एरोड्रम रोड स्थित विद्याधाम मंदिर से राजबाड़ा स्थित गोपाल मंदिर तक निकाली जाएगी। यात्रा की तैयारियां शुरू हो चुकी है। इस बार यात्रा बड़ा गणपति, टोरी कार्नर, मल्हारगंज, गोराकुंड, राजबाड़ा होते हुए गोपाल मंदिर पहुंचेगी।
यात्रा में देश-विदेश के अनेक संत एवं श्रद्धालु भी शामिल होंगे। हमेशा की तरह भगवान राधा गोविंद के लिए मथुरा-वृंदावन से पोषाख एवं विभिन्न किस्म के फूल भी बुलवाए जाएंगे। यात्रा की दिव्यता को देखते हुए विभिन्न समितियों का गठन करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। अब तक यातायात व्यवस्था, प्रसाद वितरण, रथ की साज-सज्जा, भोजन प्रसादी आदि समितियों का गठन किया गया।
शहर के पश्चिम क्षेत्र स्थित लक्षमी-वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 22 जून को सुबह 9 बजे ज्येष्ठा अभिषेक 108 रजत कलशों से किया जाएगा। अभिषेक केशर जल,आम रस के साथ पवित्र नदियों के जल के साथ ही विभिन्न सुंगधित पदार्थों से होगा।
रामानुजाचार्य नागोरिया पीठाधिपति स्वामी विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज ने बताया कि ज्येष्ठ पूर्णिमा पर होना वाला अभिषेक वर्ष का सबसे बड़ा अभिषेक होता है जिसे ज्येष्ठ नक्षत्र में किया जाता है। यह अभिषेक सभी बड़े सम्प्रदाय के मठो में अलग अलग रूप में होता है कही स्नान यात्रा तो कही ज्येष्टभिषेक और चंदन यात्रा कहा जाता है। यह अभिषेक करीब 6-7 घंटे चलता है। इसके बाद महाआरती और स्तोत्र पाठ होगा। अंत में गोष्ठी प्रसाद का वितरण किया जाएगा।