
उत्तरप्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित हैं 'तरकुल्हा देवी का मंदिर'। यह मंदिर इसलिए अनोखा है क्योंकि यहां कभी अंग्रेजों की बलि चढ़ाई जाती थी। दरअसल चौरी- चोरा गांव से कुछ ही दूरी पर यह धार्मिक स्थल है।
1857 की क्रांति के दौरान इस रियासत के राजा ठाकुर बाबू बंधू सिंह थे। वो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वह जंगल से निकलने वाले हर अंग्रेज को देखते ही मार देते थे। और उनका घड़ देवी माता के चरणों समर्पित कर देते थे।
जब अंग्रेजो के गायब होने की खबर उस समय अंग्रेजी हुकूमत को चली तो उन्होंने ठाकुर बंधू सिंह को गिरफ्तार कर लिया। जब उन्हें फांसी पर लटकाया गया तो वो 6 जल्लाद फांसी देने में असफल रहे। उसके बाद उन्होंने देवी मां का नाम लेकर अपने प्राण त्याग दिए। उनकी स्मृति में यहां एक स्मारक भी है ।
पहले यहां अंग्रेजो की बलि दी जाती थी लेकिन अब बकरों की बलि दी जाने लगी है। बकरे के मांस को यहां प्रसाद के रूप में दिया जाता है। जिसे मिट्टी की हांडियों में बनाया जाता है।