• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • धर्म
  • कहते हैं

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 28, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Kaurav Janam Katha: गर्भ से नहीं, घी से भरे मटकों से हुआ था 100 कौरवों का जन्म, जानें क्‍या है पौराणिक कथा

महाभारत के अनुसार महर्षि व्यास के वरदान के 100 कौरवों को जन्म हुआ था। इन सभी का जन्म घी से भरे मटके और उसमें रखे मांसपिंड के टुकड़ों से हुआ था। यह मां...और पढ़ें

By Bharat MandhanyaEdited By: Bharat Mandhanya
Publish Date: Fri, 28 Jun 2024 09:37:30 AM (IST)Updated Date: Fri, 28 Jun 2024 10:18:18 PM (IST)
Kaurav Janam Katha: गर्भ से नहीं, घी से भरे मटकों से हुआ था 100 कौरवों का जन्म, जानें क्‍या है पौराणिक कथा
महाभारत के अनुसार दो साल बाद घी से भरे मटकों में से कौरवों का जन्‍म हुआ था।

HighLights

  1. दो साल तक गर्भवती रही थी गांधारी
  2. गर्भ से निकला था लोहे जैसा मांसपिंड
  3. मांसपिंड के टुकड़ों से जन्मे थे कौरव

Kaurav Janam Katha धर्म डेस्क, इंदौर। महाभारत में 100 कौरवों का वर्णन मिलता है। इन सभी की माता गांधारी और पिता धृतराष्ट्र थे। महाभारत के अनुसार कौरव अधर्म और गलत नीतियों के पक्षधर थे, इसी के चलते पांडवों और कौरवों में राज्य को लेकर विवाद हुआ था और अंत में महाभारत युद्ध होता है, जिसमें पांडवों को विजय मिलती है। पौराणिक कथा के अनुसार कौरवों का जन्म महर्षि व्यास द्वारा दिए गए आशीर्वाद के चलते हुए था। कौरवों के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा क्या है यहां आपको बताते हैं।

महाभारत कथा के अनुसार, एक समय महर्षि व्यास भूख और परिश्रम से खिन्न होकर धृतराष्ट्र के महल पहुंचे थे, यहां गांधारी ने महर्षि को भोजन करवाया और उनके विश्राम की व्यवस्था की। जब महर्षि व्यास जी ने गांधारी से वर मांगने के लिए कहा तो, गांधारी ने अपने पति के समान ही सौ पुत्र मांगे। इसके बाद व्यास गांधारी को वरदान देकर वहां से चले गए।


निराश हो गई थी गांधारी

कथा के अनुसार, कुछ समय बीतने के बाद गांधारी गर्भवती हुई, लेकिन गर्भधारण के दो साल बीतने के बाद भी प्रसव नहीं हुआ। इसी बीच गांधारी को समाचार मिला कि कुंती ने सूर्य के समान एक पुत्र को जन्म दिया है, तो वे निराश हो गई और पेट पर आघात कर दिया, जिससे उनके गर्भ से मांस का एक पिंड निकला जो लोहे के समान कठोर था। यह स्थिति देख गांधारी ने मांसपिंड को फेंकने का मन बना लिया।

naidunia_image

महर्षि व्‍यास ने गांधारी को रोका

महाभारत के अनुसार जब महर्षि व्‍यास को इस घटना की जानकारी हुई तो, वे गांधारी के पास पहुंचे और उन्हें ऐसा करने से रोका। महर्षि व्यास ने गांधारी से कहा कि वे सौ मटके तैयार कर उसे घी से भर दें और उन सभी को गुप्त स्थान पर रखवाकर उसकी रक्षा की व्यवस्था करें, साथ ही मांसपिंड को ठंडे जल से सींचे।

दो साल बाद हुआ जन्‍म

जब गांधारी ने मांसपिंड को सींचा तो उसके सौ टुकड़े हो गए और इन टुकड़ों को गांधारी ने सभी 100 मटकों में रखवा दिया। जिस क्रम के साथ गांधारी से मांसपिंड के टुकड़ों को रखा था, उसी क्रम से दो साल बाद इन मटकों से सौ कौरवों का जन्‍म हुआ। इनमें सबसे पहले जन्म लेने वाला पुत्र दुर्योधन कहलाया और इस तरह गांधारी के सौ पुत्रों का जन्म हुआ था।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'