• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • शारदीय नवरात्रि
  • होम
  • धर्म
  • कहते हैं

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 30, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पहली बार उजागर हुआ केदारनाथ मंदिर का ये राज

केदारनाथ मंदिर की दीवारों पर गोदे गए अक्षरों (पुरालेखों) के अध्ययन के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है।

By Edited By:
Publish Date: Wed, 30 Apr 2014 01:22:58 PM (IST)Updated Date: Fri, 02 May 2014 09:55:31 AM (IST)
पहली बार उजागर हुआ केदारनाथ मंदिर का ये राज

आस्था के प्रतीक केदारनाथ मंदिर के कुछ महत्वपूर्ण राज पहली बार उजागर हो पाए हैं। हालही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) को मंदिर के 11-12वीं सदी के प्रमाण मिले हैं।

केदारनाथ मंदिर की दीवारों पर गोदे गए अक्षरों (पुरालेखों) के अध्ययन के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है। मंदिर की दीवारों पर प्रारंभिक नागरी व नागरी में लिखे अक्षर मिले, जो 11-12वीं सदी में ही लिखे जाते थे।

जून 2013 की आपदा में केदारनाथ मंदिर के भीतर जमकर मलबा भर गया था। एएसआइ को मलबे की सफाई के दौरान मंदिर की दीवारों पर जगह-जगह अक्षर (पुरालेख) गुदे हुए मिले, जिनके अध्ययन के लिए मैसूर से विभाग की इफिग्राफी ब्रांच के विशेषज्ञ बुलाए गए थे।

इफिग्राफी ब्रांच के निदेशक डॉ. रविशंकर की ओर से अध्ययन रिपोर्ट पूरी कर विभाग के महानिदेशक व क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून को भेजी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरालेख प्रारंभिक नागरी व नागरी में दर्ज हैं, जिससे माना जा सकता है कि मंदिर 11-12वीं सदी में अस्तित्व में आया।


विशेषज्ञों ने चिंता भी जाहिर की कि पुरालेखों में किसी तारीख का उल्लेख नहीं मिला। न ही किसी राजवंश का नाम दीवारों में दर्ज पाया गया। महत्वपूर्ण तथ्य यह भी पता चला कि पुरालेख मंदिर में आने श्रद्धालुओं या आमजन के थे। इनकी लिखावट आड़ी-तिरछी पाई गई, क्योंकि किसी राजा या खास पुरालेख में बनावट आदि का विशेष ख्याल रखा जाता था। पुरालेखों में दान देने, भगवान को नमन करने व मंदिर तक सकुशल पहुंचने आदि का जिक्र मिला।

मंदिर की दीवारों पर गोदे गए अक्षरों के अध्ययन के बाद इपिग्राफी (पुरालेख) विशेषज्ञों ने निकाला निष्कर्ष निकाला कि प्रारंभिक नागरी व नागरी ये अक्षर (पुरालेख) टंकित किए गए हैं।

बेहद खराब हो चुके हैं पुरालेख रिपोर्ट में इपिग्राफी विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की कि पुरालेखों की दशा रखरखाव के अभाव व मौसम की विषम परिस्थितियों के चलते बेहद खराब स्थिति में पहुंच गई है।

नियंत्रण के अभाव में दीवारों पर कुछ जगह पुरालेख एक दूसरे के ऊपर भी दर्ज हैं। जिससे ऐसे अक्षरों को पढ़ पाना संभव नहीं हो पाया।

अब तक मंदिर निर्माण की मान्यताएं-एक मान्यता के अनुसार केदारनाथ मंदिर को आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य ने बनाया। जबकि राहुल सांकृत्यायन लिखित अभिलेखों में मंदिर को 12-13वीं शताब्दी का बताया गया।

वहीं, ग्वालियर में मिली एक राज भोज स्तुति में मंदिर को 1076-99 काल का माना गया। पांडव या उनके वंशज जन्मेजय के समय भी मंदिर निर्माण की बात सामने आती है।