केतु
केतु ग्रह के द्वारा व्यक्ति को शुभ फल भी प्राप्त होते हैं। यह अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, तंत्र आदि का कारक होता है।
By Shailendra Kumar
Edited By: Shailendra Kumar
Publish Date: Mon, 20 Mar 2023 08:16:38 PM (IST)
Updated Date: Mon, 20 Mar 2023 08:16:38 PM (IST)
Ketu: ज्योतिष में केतु को एक अशुभ ग्रह माना जाता है। यह एक छाया ग्रह है। इसे किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। लेकिन धनु केतु की उच्च राशि है, जबकि मिथनु में यह नीच भाव में होता है। 27 रुद्राक्षों में केतु अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्र का स्वामी होता है। राहु और केतु दोनों मिलकर जन्म कुण्डली में काल सर्प दोष का निर्माण करते हैं। राहु और केतु के कारण ही सूर्य और चंद्र ग्रहण होता है।
केतु के प्रभाव
यदि किसी जातक की कुंडली में केतु तृतीय, पंचम, षष्टम, नवम एवं द्वादश भाव में हो तो जातक को इसके अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। यदि केतु गुरु ग्रह के साथ युति बनाता है तो इसके प्रभाव से राजयोग का निर्माण होता है। केतु के पीड़ित होने से जातक के सामने अचानक कोई न कोई बाधा आ जाती है। व्यक्ति किसी कार्य के लिए जो निर्णय लेता है, उसमें उसे असफलता का सामना करना पड़ता है। केतु के कमज़ोर होने पर जातकों के पैरों में कमज़ोरी आती है।