
मार्कण्य पुराण हिंदू धर्म के 18 पुराणों में सातवां पुराण है। इस पवित्र ग्रंथ में राजा विपश्चित से जुड़ी रोचक कथा का उल्लेख है।
कथा कुछ इस तरह है कि प्रचीन काल में, जनक-वंश में विपश्चित नामक एक प्रसिद्ध राजा हुए। विपश्चित बड़े धर्मात्मा, दानी, सदाचारी और दयालु राजा थे।
राजा जब वृद्ध हुए तो अपने पुत्र को राज पाट सौंप कर तपस्या के लिए वन चले गए। और वहां एक दिन उनकी मृत्यु हो गई। जब उनका निधन हुआ तो उन्हें यमदूत नर्क ले गए। उन्हें वहां कई यातनाएं दी गईं।
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इस तरह दिन बीतते गए। एक दिन वहां यमदूत आए और विपश्चित् से बोले कि, 'अब आपको स्वर्ग जाना होगा।' तब विपश्चित ने पूछा, 'कि मैनें जीवन भर सद्कर्म किए फिर भी मुझे नर्क में आना पड़ा।' तब यमदूत बोले, 'राजन् आपने उचित कहा लेकिन आपने एक छोटा-सा पाप किया था।'
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जो मनुष्य काम के अधीन होकर स्त्री के ऋतुकाल का उल्लंघन करता है, उसे नरक में आना पड़ता है। आपका बस इतना ही पाप था इसलिए आप यहां आए। अब आप स्वर्ग के सुख भोगें।