
नवरात्र का यह समय, भारत के पूर्व भाग में रहने वाले लोगों के लिए हर्षोल्लास का समय होता है। बंगाली और असम हिंदुओं के लिए नवरात्र काफी रोमांच से भरा रहता है। जब वो जागते हैं तब उनकी सुबह आस्था, परंपरा और विश्वास के तालमेल और ढाक (नगाड़े) की गूंज से शुरु होती है। यहां नवरात्र का महाउत्सव 10 दिनों तक चलता है।
यहां लोग पूरी श्रद्धा से मां की पूजा में खो जाते हैं। उनके उत्साह में आस्था की गहरी भावना होती हैं। बंगाल में दुर्गा पूजा, दुर्गा उत्सव का ही रूप है। मां दुर्गा, नकारात्मक शक्तियों पर जीत का प्रतीक हैं। उनका महिषासुर का अंत करने वाला स्वरूप इस बात का चिन्ह है। नवरात्र के 9 दिनों में, 6 दिन यहां नवरात्र की धूम रहती है। इनमें मुख्य रूप से महालया षष्ठी, महा सप्तमी, महा अष्टमी और महा नववीं और 10वें दिन विजयादशमी (दशहरा) मनाया जाता है।
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भारत के पूर्वी भाग में दुर्गात्सव बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। यहां जाकर इस उत्सव की भव्यता के दर्शन करना बड़ा ही रोमांचकारी होता है। मां दुर्गा स्त्री शक्ति का रूप हैं, वह इस पृथ्वी पर दानवों के संहार के लिए अवतरित हुई थीं।
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दुर्गाउत्सव मां दुर्गा के इसी स्वरूप की आराधना का प्रतीक है। दुर्गा पूजा का यह उत्सव बंगाल, असम के आम जन में भावनात्मक जुड़ाव पैदा करता है। मान्यता है कि मां दुर्गा पृथ्वी पर नवरात्र के दिनों में आती हैं। नवरात्र के दसवें दिन रावण का वध होता है। यानी तमाम बुराईयों को खत्म कर दिया जाता है।
धार्मिक और सांस्कृति रूप में आयोजित होने वाला यह उत्सव में इन 6 दिनों के दौरान मां दुर्गा की विशाल प्रतिमाओं की पूजा की जाती है। बड़े-बड़े पांडाल सजाए जाते हैं। पूर्वी राज्यों में नवरात्र के दौरान सामुदायिक पूजा को 'सरोजनी पूजा' भी कहते हैं।
इस समय पांडालों के आसपास किसी विशाल मेले जैसा आयोजन होने लगता है। लोग सजावट के लिए इन दिनों हैरी पॉटर गुफा, रॉकेट और भी कई तरह से दुर्गाउत्सव के दौरान बनाए गए पांडालों की विशेष साज-सज्जा करते हैं।
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देवी के इन पांच दिनों में पूजा के बाद मां की प्रतिमा को नदी में विसर्जित किया जाता है। इन पांच दिनों के अंतराल में देवी भक्त मांस, मदिरा, प्याज, गेंहू का सेवन नहीं करते हैं। नवरात्र के समय शुभ कार्य करते हैं।
कोई भी नया बिजनेस शुरु करना हो या घर के निर्माण की पहली नींव। नवरात्र के यह दिन अति उत्तम और शुभ दिन होते हैं।