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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 13, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जानिए एक पत्थर की शिला ऐसे थी ऋषि गौतम की पत्नी

तो उन्होंने रास्ते में एक सुंदर आश्रम दिखाई दिया जहां दूर-दूर तक कोई भी नहीं दिखाई दे रहा था।

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Publish Date: Sat, 13 Jun 2015 02:09:17 PM (IST)Updated Date: Thu, 18 Jun 2015 11:41:15 AM (IST)
जानिए एक पत्थर की शिला ऐसे थी ऋषि गौतम की पत्नी

ऋषि विश्वामित्र भगवान श्रीराम और लक्ष्मण जी के साथ राक्षसों का दमन करते हुए जा रहे थे। वह राजा जनक की राजधानी से कुछ ही दूरी पर थे। तो उन्होंने रास्ते में एक सुंदर आश्रम दिखाई दिया जहां दूर-दूर तक कोई भी नहीं दिखाई दे रहा था।

श्रीराम ने आश्चर्य से पूछा, 'गुरुवर यहां कोई दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा है।' तब विश्वामित्र ने कहा, 'इस आश्रम के पीछे ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या की बहुत ही दुःख भरी कहानी है।'

पहले इस आश्रम में ऋषि गौतम अपनी पत्नी के साथ सुख से रहते थे। माता अहिल्या इतनी सुंदर थी कि उनके रूप की चर्चा तीनों लोक में थी। जब यह बात देवराज इंद्र को पता चली तो वो उनके प्रति आकर्षित हो गए।


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एक दिन जब ऋषि गौतम अपनी कुटिया से बाहर गए तो इंद्र गौतम ऋषि का रूप रखकर माता अहिल्या के पास आए और उन पर मोहित हो गए। लेकिन जब गौतम ऋर्षि घर लौटे तो, अपने ही स्वरूप को देखकर चौंक गए।

इंद्र अपने असली रूप में आए और ऋषि से क्षमा याचना करने लगे। तब गौतम ऋषि ने इंद्र को नपुंसक बनने का शाप दे दिया ( यह शाप अलग-अलग पौराणिक ग्रंथों में अलग-अलग तरीके से बताया गया है।) और अपनी पत्नी अहिल्या को पत्थर की शिला बन जाने का शाप दिया।

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देवराज इंद्र को मिले शाप से देवगण काफी दुःखी हो गए।ऋषि गौतम ने अपनी पत्नी अहिल्या से कहा कि तुम्हें इसी तरह ही प्रायश्चित करना होगा और जब भगवान विष्णु जी के मानवरूप श्रीराम यहां आएंगे और इस शिला पर अपने पवित्र चरण रखेंगे। तब तुम्हारा उद्धार होगा।विश्वामित्र बोले, 'हे राम आप अपने पावन चरणों को इस शिला पर रखें ताकि माता अहिल्या का उद्धार हो सके।'