यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 27, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आज ही जानिए अपना आने वाला कल
वास्तु शास्त्र के जरिए काफी हद तक आप अपने भविष्य के बारे में भी जान सकते हैं।
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Publish Date: Mon, 27 Apr 2015 04:01:18 PM (IST)Updated Date: Fri, 01 May 2015 02:28:49 PM (IST)

वास्तु शास्त्र के जरिए काफी हद तक आप अपने भविष्य के बारे में भी जान सकते हैं। भविष्य जानने के लिए वास्तु एवं गणित सूत्र के अनुसार खुले स्थान या अपने घर की लंबाई-चौड़ाई के योग को आठ से गुणा करके नौ से भाग कीजिए। भाग देने पर शेष बचने वाले अंक का फल इस प्रकार माना गया है।
- यदि एक शेष रहे तो घर में असामाजिक तत्वों से परिचय होता है। ये किरायदार भी हो सकते हैं जो आपको कष्ट देकर शोषण करते रहेंगे।
- दो शेष रहने पर आपका जीवन भोग विलास और ऐश्वर्य वाला रहेगा। सभी सुखों की प्राप्ति होगी।
- तीन शेष रहने पर मां सरस्वती का आशीष मिलेगा। बुद्धि के धनी रहेंगे आपकी गिनती बुद्धिजीवियों में रहेगी।
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- चार शेष रहने पर आप विद्वान बनेंगे और धर्म, कर्म में खोए रहते हुए लक्ष्य की प्राप्ति करेंगे।
- पांच बाकी रहने पर प्राकृतिक पंच तत्व आपके सहायक होंगे। आप समाज में, नगर में, राज्य में या देश में राजा समान अधिकार एवं ऐश्वर्य भोगेंगे।
- छः शेष रहने पर पराक्रम में नपुंसकता लाता है। व्यक्ति जी तोड़ परिश्रम करता है। किंतु उसे पूरा फल नहीं मिलता। उसकी कमाई मित्र और रिश्तेदार ही खा जाते हैं और वह पत्नी और संतान सुख से वंचित रहता है।
- सात शेष रहने रहे तो गृहस्वामी के यश में बृद्धि होती है। धन आने के कई स्त्रोत बनते हैं। लाभ ज्यादा और व्यय कम रहता है। अतुल संपत्ति का वह मालिक रहता है।
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- आठ शेष रहे तो गृहस्वामी का जीवन दरिद्रता से बीतता है। व्यक्ति जितना व्यापार करेगा उतनी ही हानि होती है। ऐसे व्यक्ति का धन ज्यादातर सुरा-सुंदरियों, टैक्सों और सट्टे में जाता है।
- जब शून्य रहे तो मान लेना चाहिए बुरे दिन शुरु हो गए हैं। धन की बर्बादी। व्यापारिक मंदी और समाज में अपमान झेलना पड़ सकता है।