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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 11, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भगवान श्रीगणेश से सीखें बेहतर लाइफ मैनेजमेंट

इसके पीछे भी एक दर्शन है। एक नैतिक दर्शन, जिसके प्रबंधन और सिद्धांत पर ग़ौर किया जाए तो यह भी हमें जीवन जीने की कला सिखाता है।

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Publish Date: Mon, 11 May 2015 03:46:35 PM (IST)Updated Date: Tue, 12 May 2015 04:34:40 PM (IST)
भगवान श्रीगणेश से सीखें बेहतर लाइफ मैनेजमेंट

बुद्धि और ज्ञान के दाता। भगवान श्रीगणेश दूरदर्शी योजनाओं की शुरुआत के लिए जाने जाते हैं इसलिए किसी कार्य की शुरुआत में इनकी सर्वप्रथम पूजा होती है। अमूमन, जब हम भगवान श्रीगणेश का स्मरण करते हैं तो हाथी के सिर, बड़े कान, छोटी आंखें, लंबी नाक जैसा दृश्य दिखाई देता है।

यह दृश्य अद्भुत और कलात्मक दृश्य से कम नहीं होता। भगवान श्री गणेश का वाहन मूषक यानी चूहा काफी बौना होता है है। इसके पीछे भी एक दर्शन है। एक नैतिक दर्शन, जिसके प्रबंधन और सिद्धांत पर ग़ौर किया जाए तो यह भी हमें जीवन जीने की कला सिखाता है।


  • छोटी आंखें: आंखें किसी भी कार्य में ध्यान केंद्रित रखने का संदेश देती हैं। जिस तरह एक चिड़िया एक छोटे से कीट पर अपना ध्यान केंद्रित करती है और अंत में उसका शिकार करती है, ठीक उसी तरह हमें अपने लक्ष्य की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। ध्यान रखें इसके लिए परिवेश में सतर्कता के प्रति सचेत भी रहना होगा।

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  • बड़े कान : भगवान लंबोदर के बड़े कान सुनने की कला को दर्शाते हैं। यानी एक अच्छा श्रोता वो है जो एकाग्र मन से सुने, क्योंकि अगर आप तल्लीनता से सुनते हैं तो आप अपनी बात कहते समय या अपने विचार लिखते समय उसके तमाम पहलुओं पर बेहतर तरीके से अमल कर सकते हैं।

  • छोटा मुंह : कम बात करने का प्रतीक और अधिक काम करते रहने को दर्शाता है। उत्पादकता की दृष्टि से यह बेहतर है।
  • लंबी नाक और घूमावदार सूंड़: सफलता का कोई सीधा रास्ता नहीं है। यह घुमावदार और टेढ़ा मेढ़ा है। लंबी नाक इसी बात को इंगित करती है।
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    • बड़ा पेट : गणेश जी का पेट वैदिक ज्ञान का खजाना है। इसके साथ ही पेट पचाने की क्षमता भी रखता है। यानी व्यक्ति अपने विवेक से बेहतर कार्य करने की क्षमता रखता है।
    • चूहा: चूहा यानी कभी भी छोटे जीव की उपेक्षा नहीं करें। क्यों कि यह भी प्रभावी हो सकता है। किसी जीव के आकार से कोई फर्क नहीं पढ़ता। वैसे चूहा अंधेरे का प्रतीक है क्यों कि उसे अंधेरे में सब कुछ दिखाई देता है। भगवान गणेश का वाहन चूहा अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाता है। यह इंसान के एक उद्देश्य के रूप में होता है।