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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 06, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

गुप्तचरों की कहानी, सदियों पुरानी

मनु ने चर-व्यवस्था में 'रक्षाधिकृत' गुप्तचर (पुलिस) उल्लेख है।

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Publish Date: Wed, 06 Jan 2016 12:15:49 PM (IST)Updated Date: Mon, 11 Jan 2016 11:54:33 AM (IST)
गुप्तचरों की कहानी, सदियों पुरानी

गुप्तचर यानी जासूस, जिन्हें हम जासूस के नाम से जानते हैं। पौराणिक काल की शुरुआत से ही गुप्तचर मौजूद हैं। यहां तक कि संसार की जितनी भी प्राचीन सभ्यताएं हैं उनमें गुप्तचरों का उल्लेख जरूर मिलता है। ऋगवेद, अथर्ववेद, पुराण, मनु स्मृति और अर्थशास्त्र में गुप्तचरों का उल्लेख है।

सबसे पहले ऋग्वेद में उल्लेख

सबसे प्राचीन ऋगवेद गुप्तचर के बारे में विस्तार से बताया गया है। अथर्ववेद में जल के देवता वरुण को सहस्त्रनेत्र कहा गया है, यानी वरुण के सहस्त्रों (हजारों) गुप्तचर थे। गुप्तचर ही राजा के नेत्र होते थे। उन्हीं के माध्यम से राजा पूरे सम्राज्य की जानकारी रखता था।


वेदों में गुप्तचारिणी सभा का भी उल्लेख है जो दस्युओं से संबंधित सूचनाएं देने का कार्य करती थी। स्त्री गुप्तचरों की परंपरा वैदिक काल में ही आरंभ हो गई थी। ऋषियों की तपस्या भंग करने के लिए स्वर्ग से धरती पर आने वाली अप्सराएं गुप्तचर थीं।

श्री राम के गुप्तचर थे विद्वान

रामायण में गुप्तचरी के दो उद्देश्य बतलाए गए हैं। पहला आत्मरक्षा और दूसरा राष्ट्र रक्षा। रामायण काल में अत्यंत उच्च कोटी की गुप्तचर व्यवस्था थी। राम और रावण की गुप्तचर व्यवस्था में भी बहुत अंतर था। जहां राम के गुप्तचर विद्वान और नीति का अनुसरण करते थे। वह मृदुभाषी व्यवहार वाले थे, वहीं रावण के गुप्तचर मायावी और धोखेबाज थे।

श्री कृष्ण के पौत्र के लिए गुप्तचर

हरिवंश पुराण में 'बाणासुर प्रसंग' है जिसमें उल्लेख है कि जब अनिरुद्ध ( प्रद्युम्न के पुत्र तथा श्री कृष्ण के पौत्र थे अनिरुद्ध) जब गुप्त रूप से बाणासुर की कन्या के महल में पहुंचे थे। तब बाणासुर के महल में श्री कृष्ण के गुप्तचर मौजूद थे। उषा-प्रद्युम्न के विवाह के बाद इन गुप्तचरों को वहां से वापिस बुला लिया गया था।

मनु के 'रक्षाधिकृत' गुप्तचर

मनु ने चर-व्यवस्था में 'रक्षाधिकृत' गुप्तचर (पुलिस) उल्लेख है। यह दो दो भागों में बांटा था। प्रथम अपराध अनुसंधान विभाग दूसरा सामान्य पुलिस विभाग। प्राचीन काल में अपराध अनुसंधान किस प्रकार किया जाता था इस संबंध में कई कथाएं मनु से संबंधित ग्रंथों में मिलती हैं।

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अर्थशास्त्र में 'समष्ट' एवं 'संचार'

कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी गुप्तचरों का उल्लेख मिलता है। कौटिल्य ने अपने अर्थशास्त्र में गुप्तचरों के उपयोग और उनके बारे में विस्तार से बताया है।

उन्होंने अर्थशास्त्र में 'समष्ट' एवं 'संचार' नामक दो प्रकार के गुप्तचरों के बारे में बताते हैं पहले यानी समष्ट कोटि के गुप्तचर स्थानीय सूचनाएं देते थे और संचार कोटि के गुप्तचर विभिन्न स्थानों का परिभ्रमण करके सूसचनाएं एकत्र करते थे।

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समष्ट कोटि के गुप्तचरों के कई प्रकार होते थे जैसे कि कापातिक, उष्ठित, गृहपतिक, वैदाहक तथा तापस। संचार नामक गुप्तचर में राशद और स्त्री गुप्तचर जैसे भिक्षुकी, परिव्राजिका, मुंड, विशाली भी होती थीं।

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