• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • दिवाली पूजन 2026
  • होम
  • धर्म
  • कहते हैं

1100 साल पुराना है MP का यह माला देवी जैन मंदिर, पहाड़ी काटकर बनाया गया गर्भगृह, जानिए क्या है इसका इतिहास

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के ग्यारसपुर में स्थित माला देवी जैन मंदिर करीब 1100 साल पुराना है। इसका गर्भगृह पहाड़ी की चट्टान काटकर बनाया गया है। जर्जर हालत के कारण मंदिर बंद है और ASI इसके संरक्षण की तैयारी कर रहा है।

By Digital DeskEdited By: Akriti kumari
Publish Date: Wed, 04 Nov 2026 04:56:46 PM (IST)Updated Date: Wed, 04 Nov 2026 04:56:46 PM (IST)
1100 साल पुराना है MP का यह माला देवी जैन मंदिर, पहाड़ी काटकर बनाया गया गर्भगृह, जानिए क्या है इसका इतिहास

HighLights

  1. 1100 साल पुराना माला देवी मंदिर
  2. पहाड़ी चट्टान काटकर बना गर्भगृह
  3. ASI करेगा मंदिर का संरक्षण

धर्म डेस्क। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के ग्यारसपुर में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जो करीब 1100 साल से भारतीय इतिहास और स्थापत्य कला की कहानी समेटे हुए है। पहाड़ी की प्राकृतिक चट्टान को काटकर बनाए गए इस मंदिर का नाम माला देवी मंदिर है। यहां जैन तीर्थंकरों की प्राचीन प्रतिमाएं, बारीक नक्काशी और अनोखी बनावट देखने को मिलती है। गुर्जर-प्रतिहार काल की कला का नमूना माना जाने वाला यह मंदिर जैन धर्म की ऐतिहासिक विरासत से भी जुड़ा है।

नौवीं शताब्दी में हुआ था मंदिर का निर्माण

माला देवी मंदिर विदिशा से करीब 38 किलोमीटर दूर ग्यारसपुर की पहाड़ी पर स्थित है। इसका निर्माण नौवीं शताब्दी के उत्तरार्ध यानी लगभग 850 से 900 ईस्वी के बीच माना जाता है। इस हिसाब से मंदिर करीब 1100 साल पुराना है।


इसकी सबसे खास बात इसकी बनावट है। मंदिर का एक हिस्सा पहाड़ की प्राकृतिक चट्टान को काटकर बनाया गया है, जबकि बाकी हिस्सा तराशे गए पत्थरों से तैयार किया गया है। यहां प्रवेश मंडप, सभा मंडप, गर्भगृह और परिक्रमा की व्यवस्था दिखाई देती है। मंदिर के नक्काशीदार स्तंभ, पत्थरों की जालियां और ऊंचा शिखर उस दौर की स्थापत्य कला को दर्शाते हैं।

भगवान शांतिनाथ और पार्श्वनाथ की प्रतिमाएं हैं खास

मंदिर में भगवान शांतिनाथ की पद्मासन मुद्रा में प्रतिमा विशेष महत्व रखती है। इसके साथ हिरण का चिह्न बना है, जो जैन परंपरा में भगवान शांतिनाथ का पहचान चिह्न है। यहां भगवान पार्श्वनाथ की प्राचीन प्रतिमा और प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ से जुड़ी यक्षिणी चक्रेश्वरी की मूर्ति भी मौजूद है। अंबिका और पद्मावती जैसी यक्षिणियों की आकृतियां भी मंदिर की मूर्तिकला को खास बनाती हैं।

जैन परंपरा में कैसे होती है पूजा?

जैन धर्म में तीर्थंकरों की पूजा उनके बताए अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि के मार्ग को याद करने के लिए की जाती है। जैन मंदिरों में सामान्य तौर पर जल, चंदन, अक्षत और दीप अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु दर्शन, मंत्र-जाप और परिक्रमा करते हैं। हालांकि, माला देवी मंदिर में वर्तमान पूजा की नियमित व्यवस्था को लेकर प्रमाणित जानकारी उपलब्ध नहीं है।

अब ASI करेगा मंदिर का संरक्षण

लंबे समय से जर्जर हालत में होने के कारण मंदिर पर्यटकों के लिए बंद बताया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इसकी संरचना को सुरक्षित रखने की तैयारी कर रहा है। योजना के तहत मंदिर के पत्थरों को पहचान और क्रम के साथ खोलकर उनका रिकॉर्ड बनाया जाएगा। इसके बाद उन्हीं पत्थरों को दोबारा लगाकर मंदिर को संरक्षित किया जाएगा।

एक क्लिक पर पढ़ें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की लेटेस्ट खबरें। Hindi News पढ़ें। MP News, Chhattisgarh news, आज का राशिफल और आज का मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पढ़ें।