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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 16, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इसलिए आती है अमावस्या और पूर्णिमा

मान्यता है कि सोमेश्वर तीर्थ में भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से क्षय, कोढ़ और त्वचा संबंधित तमाम रोगों से छुटकारा मितला है।

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Publish Date: Tue, 16 Jun 2015 02:39:27 PM (IST)Updated Date: Sat, 20 Jun 2015 09:58:25 AM (IST)
इसलिए आती है अमावस्या और पूर्णिमा

बुधदेव, सोमदेव यानी चंद्रदेव के पुत्र हैं। सोमदेव ने गुरु पत्नी तारा का समागम किया था इसलिए वह एक भयानक क्षय रोग से पीड़ित हो गए। इससे समस्त लोकों में हाहाकार मच गया।

सोमदेव की इस दशा को देखते हुए ब्रह्माजी ने कहा कि, 'यह तुम्हारे पूर्व दुष्कर्मों का फल है। अब तुम्हें केवल भगवान शिव ही इस समस्या से उबार सकते हैं। इसके लिए भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र यानी 'ऊं नमः शिवाय' का जप कर तुम्हें तप करना होगा।' यह जप, छः मास तक चला। छठवें मास में सोमदेव ने दस करोड़ बार जप किया।

जप के प्रभाव से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने सोमदेव से वर मांगने को कहा। सोमदेव ने कहा, 'जो कृत्य मैंने गुरु पत्नी तारा के साथ किया उस पाप कर्म से आप मुझे मुक्त करें।'

पढ़ें:चंद्रदेव की थीं 27 पत्नियां, फिर भी किया तारा का अपहरण

भगवान शिव ने कहा, तुम्हारे पाप कर्म तो तुम्हें भोगने ही होंगे मैं इन्हें कम कर सकता हूं। इसलिए आज से तुम 15 दिन बढ़ोगे और 15 दिन घटते क्रम में रहोगे। यानी पृथ्वी पर तुम पूर्णिमा में पूरा रूप धारण करोगे और अमावस्या में तुम विलुप्त हो जाओगे।


पढ़ें: गुरु नानक जी के आशीर्वाद का रहस्य

जहां पर सोमदेव ने भगवान शिव की आराधना की वह जगह सोमश्वर तीर्थ कहलाई। सोम का यश बढ़ाने के लिए भगवान सिव को उन्हीं के नाम पर सोमेश्वर भी कहा जाता है। मान्यता है कि सोमेश्वर तीर्थ में भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से क्षय, कोढ़ और त्वचा संबंधित तमाम रोगों से छुटकारा मिलता है।