श्रीरामचरितमानस और हनुमान चालीसा जैसी अनमोल कृति लिखकर गोस्वामी तुलसीदास अपनी इन्हीं कृति के साथ अमर हो गए हैं। गोस्वामी तुलसीदास का जीवन काफी संघर्षमय तरीके से बीता। उनका जन्म उत्तरप्रदेश के बांदा जिले में ग्राम राजापुर में हुआ था।
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गोस्वामी तुलसीदास के बारे में ऐसी ही कुछ रोचक बातें...
- गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने जीवनकाल में 12 ग्रन्थ लिखे। उन्होंने संस्कृत के साथ ही हिन्दी भाषा के सर्वश्रेष्ठ कवियों में माना जाता है।
- तुलसीदास जी की हस्तलिपि अत्यधिक सुन्दर थी। उन्हें कैलीग्राफी की कला आती थी। उनके जन्म-स्थान राजापुर के एक मन्दिर में श्रीरामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड की एक प्रति सुरक्षित रखी हुई है।
- गोस्वामी तुलसीदास के पिता का नाम आत्माराम दुबे और माता का नाम हुलसी था।
- गोस्वामी तुलसीदास की पत्नी रत्नावली ने एक स्वरचित दोहे के माध्यम से तुलसीदास को शिक्षा दी। इस दोहे से प्रभावित होकर वह श्रीराम की भक्ति में लीन हो गए। वह दोहा है...अस्थि चर्म मय देह यह, ता सों ऐसी प्रीति! नेकु जो होती राम से, तो काहे भव-भीत ?
- जन्म लेने के तुरंत बाद ही तुलसीदास जी ने 'राम' नाम का उच्चारण किया जिससे उनका एक नाम रामबोला भी है।
- रामबोला के जन्म के दूसरे दिन मां हुलसी का निधन हो गया। पिता ने उन्हें चुनियां नाम की एक दासी को सौंप दिया था।
- तुलसीदास जी जब काशी के असीघाट पर एक रात कलियुग इंसान के रूप में आया और उन्हें परेशान करने लगा। तब उन्होंने हनुमानजी का ध्यान किया। तब जाकर कलयुग ने उनका पीछा छोड़ा।
- हनुमान जी ने तुलसीदास जी को प्रार्थना के पद रचने के लिए कहा, इसके बाद तुलसीदास ने अंतिम कृति 'विनय-पत्रिका' लिखी और उसे प्रभु श्रीराम के चरणों में समर्पित कर दिया। श्रीराम जी ने उस पर स्वयं अपने हस्ताक्षर किए थे।
- 'एनसाइक्लोपीडिया ऑफ रिलीजन एंड एथिक्स' में ग्रियर्सन ने भी 12 ग्रन्थों का उल्लेख किया है।
ये हैं: श्रीरामचरितमानस, रामललानहछू, वैराग्य-संदीपनी, बरवै रामायण, पार्वती-मंगल, जानकी-मंगल, रामाज्ञाप्रश्न, दोहावली, कवितावली, गीतावली, श्रीकृष्ण-गीतावली और विनय-पत्रिका।
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इनके अलावा कुछ रचनाएं: सतसई, छंदावली रामायण, कुंडलिया रामायण, राम शलाका, संकट मोचन, करखा रामायण, रोला रामायण, झूलना, छप्पय रामायण, कवित्त रामायण कलिधर्माधर्म निरूपण और हनुमान चालीसा।
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