
पुराणों में कलियुग के संदर्भ में कई रोचक जानकारियां मिलती है। दिलचस्प बात यह है कि इस युग में विवाह को धर्म नहीं माना गया है। शिष्य अपने गुरु के अधीन नहीं रहेंगे। पुत्र अपने कर्तव्य और धर्म से दूर रहेंगे।
कलियुग में दान देना सबसे बड़ा धर्म बताया गया है। मनुष्य रूचि के अनुसार अनुष्ठान कर उपवास, परिश्रम और धन व्यय करता है तो यह भी धर्म माना गया है। वस्त्र और आभूषणों को अहंकार की संज्ञा दी गई है।
जब तक गाय दूध देती रहेगी, तभी तक गौ माता के प्रति सम्मान और प्रेम रहेगा। लेकिन कलियुग में थोड़ा सा प्रयत्न करने से ही मनुष्य पुण्य का भागी बन सकता है।
इसलिए कलियुग को अन्य युगों से श्रेष्ठ माना गया है। इसमें भगवान के स्मरण मात्र से ही कठोर तपस्या का फल मिल जाता है।