
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारे आसपास की हर ऐतिहासिक इमारत के पीछे कोई न कोई अनोखी कहानी छिपी होती है। ऐसी ही एक बेहद दिलचस्प और विस्मयकारी कहानी मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित ऐतिहासिक 'श्री राम राजा मंदिर' की है। यदि आप इस मंदिर की बनावट को देखें, तो यह किसी पारंपरिक हिंदू मंदिर जैसा नजर नहीं आता। इसका कारण यह है कि यह मूल रूप से ओरछा की रानी गणेशकुंवारी का महल था, जिसे पूर्व में 'रानी महल' के नाम से जाना जाता था।
यह पूरे भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान राम को एक देवता के रूप में नहीं, बल्कि एक 'राजा' के रूप में पूजा जाता है। आइए जानते हैं इस भव्य मंदिर के पीछे का इतिहास और इसकी अनोखी परंपराएं।
लोक मान्यताओं के अनुसार, ओरछा के राजा मधुकर शाह जू देव भगवान कृष्ण के परम भक्त थे, जबकि उनकी पत्नी रानी गणेशकुंवारी भगवान राम की अनन्य भक्त थीं। एक बार राजा ने रानी से अपने साथ ब्रज-मथुरा चलने को कहा, लेकिन रानी अयोध्या जाना चाहती थीं। दोनों अपनी-अपनी जिद पर अड़े रहे और रानी ने राजा के साथ जाने से मना कर दिया।
इससे नाराज होकर राजा ने रानी के सामने एक कठिन शर्त रख दी कि वे ओरछा तभी लौटें, जब उनके साथ साक्षात भगवान राम हों। रानी अयोध्या पहुंचीं और सरयू नदी के तट पर कठिन तपस्या शुरू कर दी। जब काफी समय तक प्रभु राम प्रकट नहीं हुए, तो उन्होंने हताश होकर आधी रात को सरयू नदी में छलांग लगा दी।
रानी की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान राम नदी में ही उनकी गोद में बाल रूप में प्रकट हो गए। भगवान राम ने ओरछा चलने के लिए रानी के सामने तीन कड़े नियम रखे...
जब राजा मधुकर शाह को पता चला कि रानी भगवान राम को लेकर ओरछा आ रही हैं, तो उन्होंने तुरंत एक भव्य मंदिर का निर्माण शुरू करवा दिया। लंबे सफर से लौटने के बाद रानी बहुत थक चुकी थीं, इसलिए वे भगवान राम के बाल रूप को लेकर अपने महल (रानी महल) में आ गईं और उन्हें वहीं फर्श पर बैठाकर खुद आराम करने चली गईं।
लेकिन भगवान राम की तीसरी शर्त के अनुसार, उन्हें जहाँ पहली बार बैठाया गया, वे वहीं स्थापित हो गए। इसके बाद उन्हें उस स्थान से हिलाया नहीं जा सका। यही कारण है कि रानी का वो आलीशान महल ही हमेशा के लिए 'राम राजा मंदिर' बन गया।
मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक बड़ा आंगन है, जहां स्थानीय दुकानदार हस्तनिर्मित खिलौने, पारंपरिक आभूषण और पवित्र धार्मिक वस्तुएं बेचते हैं। यदि आप राम विवाह के दौरान ओरछा आते हैं, तो आप यहां हेरिटेज वॉक, विलेज टूर और बेतवा नदी में रिवर राफ्टिंग जैसे रोमांचक अनुभवों का आनंद भी ले सकते हैं।