
कश्मीर की वादियों में पगडंडियों पर चलने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए यात्रा के दौरान धार्मिक स्थल का आना आस्था और ज्यादा बढ़ा देता है। अमरनाथ यात्रा के दौरान कई धार्मिक स्थल स्थल पड़ते हैं। इन्हीं में से कुछ विशेष धार्मिक स्थलों की जानकारी इस तरह है।
बालटाल मार्ग : बालटाल गर्मियों की राजधानी श्रीनगर से करीब 60 किलोमीटर दूर और सोनमर्ग से करीब 15 किलोमीटर दूर है। इस तीर्थस्थल के रास्ते जाने वाले श्रद्धालुओं को खड़ी चट्टानों के साथ संकरे रास्तों से गुजरना पड़ता है।
तीर्थयात्रियों को पवित्र गुफा तक पहुंचने से पहले करीब तीन किलोमीटर बर्फीले रास्ते से जाना पड़ता है। हालांकि इस मार्ग से कम लोग जाते हैं। अमूमन तीर्थ यात्री पहलगाम के रास्ते जाने का विकल्प चुनते हैं।
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बालटाल के रास्ते जाने पर श्रद्धालुओं को गंदेरबल जिले में स्थित माता 'खीर भवानी मंदिर' में स्थित पवित्र झरने का दर्शन करने का अवसर मिल जाता है। ऐसा माना जाता है कि यदि कोई अप्रिय घटना होनी हो तो इस झरने का रंग बदल जाता है।
पहलगाम मार्ग: पहलगाम के रास्ते से तीर्थयात्रियों को रघुनाथ जी मंदिर के दर्शन करने के साथ अनंतनाग जिले में स्थित मार्तंड के सूर्य मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। यहां से आगे चलने के बाद अमराथ यात्रा के लिए जा रहे तीर्थ यात्री लिड्डर नदी के तट पर स्थित भगवान शिव के मंदिर तक पहुंचते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने अपने वाहन नंदी को यही छोड़ दिया था और वे पवित्र गुफा की ओर प्रस्थान कर गए थे।
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पहला पड़ाव 16 किलोमीटर दूर चंदनवाड़ी में है। लिड्डर नदी के किनारे का दृश्य बेहद रमणीक है। मान्यता है कि भगवान शिव ने इस स्थान पर अपने माथे पर चंदन पाउडर मला था इसलिए इसका नाम चंदनवाड़ी पडा। चंदनवाड़ी पहुंचने के बाद यात्रा काफी कठिन और चुनौती भरे मार्ग से पिस्सू टॉप की तरफ बढ़ती है।
हर हर महादेव का जाप करते हुए इस कठिन मार्ग से गुजरते हुए किसी का भी मन आनंदित हो उठता है और कठिन रास्ता भी आसान लगने लगता है। खड़ी चढ़ाई वाले यात्रा के इस दौर को पूरा करने के बाद श्रद्धालु कहीं रूककर आराम करते हैं।
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अगला पड़ाव है शेषनाग जहां तीर्थयात्री पवित्र झरने में स्नान करते हैं। कहते हैं कि शेषनाग के पवित्र झरने में स्नान करके सभी पाप धुल जाते हैं।
माना जाता है कि भगवान शिव ने पवित्र गुफा की ओर जाते समय अपने शेषनाग को इसी झरने पर छोड़ दिया था। यह स्थान वास्तव में बर्फ की चोटियों से घिरी झील है जिसकी शक्ल सांप के सिर की तरह दिखाई देती है।
और इस तरह यात्रा पूरी होती है और अमरनाथ यात्रा पर जा रहे तीर्थयात्री, बाबा अमरनाथ की गुफा तक आस्था से सराबोर होकर बाबा के दिव्य दर्शन के लिए पहुंच जाते हैं।