• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • धर्म
  • कहते हैं

अकाल मृत्यु पितरों को मोक्ष दिलाने का स्थल, जहां सूर्यास्त के बाद रुकना मना है... पढ़िए प्रेतशिला पर्वत का अनोखा रहस्य

Mysterious Place in India: गयाजी की धार्मिक विरासत सनातन और बौद्ध दोनों धर्मों के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानत...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Wed, 26 Nov 2025 04:47:08 PM (IST)Updated Date: Wed, 26 Nov 2025 04:50:29 PM (IST)
अकाल मृत्यु पितरों को मोक्ष दिलाने का स्थल, जहां सूर्यास्त के बाद रुकना मना है... पढ़िए प्रेतशिला पर्वत का अनोखा रहस्य
प्रेतशिला पर्वत की रहस्यमयी कहानी पढ़िए।

HighLights

  1. गया में स्थित प्रेतशिला पर्वत प्रसिद्ध तीर्थस्थल।
  2. असमय मृत पितरों का विशेष पिंडदान होता।
  3. सूर्यास्त बाद यहां रुकना कड़ाई से वर्जित।

धर्म डेस्क: बिहार का गया शहर अपनी समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा और धार्मिक महत्व के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। यह वह भूमि है जहां विष्णुपद मंदिर और महाबोधि मंदिर स्थित हैं, और जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन करने तथा अपने पितरों का पिंडदान करने पहुंचते हैं। पितृपक्ष के दौरान फल्गु नदी के तट पर पितरों के उद्धार के लिए तर्पण और पिंडदान की विशेष विधि संपन्न की जाती है। सामान्य दिनों में भी भक्त अपने पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण करने के लिए गयाजी आते रहते हैं।

भारत में कई रहस्यमय जगह हैं। लेकिन इस पवित्र क्षेत्र में एक ऐसा स्थल भी मौजूद है, जो अपनी रहस्यमय मान्यताओं और धार्मिक महत्ता के कारण विशेष रूप से जाना जाता है। इस स्थल का नाम है प्रेतशिला पर्वत। यह पर्वत असमय या अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पितरों के पिंडदान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सनातन धर्म के शास्त्रों में इसे प्रेतशिला तीर्थ कहा गया है। मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से असमय गुजरे पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है।


प्रेतशिला पर्वत पर भगवान धर्मराज यम का मंदिर स्थित है। पितृ पक्ष में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जो अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से तर्पण करते हैं। प्रचलित मान्यता के अनुसार, असमय मरने वाले पितरों का तर्पण पितृ पक्ष की अष्टमी तिथि को विशेष रूप से किया जाता है। हालांकि सामान्य दिनों में भी प्रेतशिला पर तर्पण और पिंडदान संभव है।

यहां पितरों का पिंडदान सत्तू से करने की परंपरा है। प्रेतशिला पर्वत के शीर्ष पर पहुंचकर पिंडदान कराया जाता है। इस स्थान के बारे में एक महत्वपूर्ण और रोचक बात यह है कि सूर्यास्त के बाद यहां रुकने की सख्त मनाही है। माना जाता है कि यह स्थान असमय मृत पितरों की आत्माओं का वासस्थल है, इसलिए संध्या के बाद यहां ठहरना अशुभ और जोखिमपूर्ण माना गया है।

गयाजी का प्रेतशिला पर्वत न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन परंपराओं का प्रतीक भी है, जो आज तक आस्था के रूप में जीवित है।

यह भी पढ़ें- Grahan 2026: कब लगेगा साल 2026 का पहला सूर्य और चंद्र ग्रहण? भूल कर भी न करें ये गलतियां