
धर्म डेस्क: सनातन धर्म में ज्योतिष शास्त्र को विशेष स्थान प्राप्त है। ज्योतिष के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन, भविष्य और ग्रहों की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करता है। कुंडली में जब अशुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ती है, तो व्यक्ति को जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं और रुकावटों का सामना करना पड़ता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कई बार व्यक्ति को अपने पूर्व कर्मों के कारण संघर्षों से गुजरना पड़ता है। कुंडली में दोष होने पर करियर, कारोबार और पारिवारिक जीवन में मनचाही सफलता नहीं मिल पाती। ऐसे में ग्रह दोषों का निवारण करना आवश्यक माना जाता है।

गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए ज्योतिषाचार्य पुखराज रत्न धारण (Pukhraj Gemstone Benefits) करने की सलाह देते हैं। मान्यता है कि पुखराज धारण करने से देवताओं के गुरु बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से तीन राशियों के जातकों के लिए यह रत्न अत्यंत शुभ और लाभकारी माना गया है।
पुखराज रत्न का सीधा संबंध बृहस्पति देव से होता है। इसे धारण करने से कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है, जिससे जातक की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके प्रभाव से घर में सुख-शांति बनी रहती है और करियर व व्यापार से जुड़ी परेशानियां भी दूर होती हैं।
देवताओं के गुरु बृहस्पति देव धनु और मीन राशि के स्वामी हैं, जबकि कर्क राशि में वे उच्च के माने जाते हैं। भगवान विष्णु को बृहस्पति देव का आराध्य माना गया है। ज्योतिष के अनुसार कर्क, धनु और मीन राशि के जातकों पर बृहस्पति देव की विशेष कृपा रहती है। इन्हीं कारणों से इन तीनों राशियों के लिए पुखराज रत्न धारण करना शुभ फल प्रदान करता है।