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साल में एक बार सीधी होती है माता की गर्दन, बाकी वक्त 45 डिग्री झुकी हुई, जानें क्या है रायसेन के कंकाली माता मंदिर का रहस्य..

रायसेन जिले के गुदावल गांव में स्थित कंकाली माता मंदिर में स्थापित मां काली की गर्दन हमेशा झुकी रहती है। यह गर्दन साल में सिर्फ एक बार ही सीधी होती है...और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Fri, 24 Jul 2026 02:33:41 PM (IST)Updated Date: Fri, 24 Jul 2026 02:33:41 PM (IST)
साल में एक बार सीधी होती है माता की गर्दन, बाकी वक्त 45 डिग्री झुकी हुई, जानें क्या है रायसेन के कंकाली माता मंदिर का रहस्य..
रायसेन का कंकाली माता मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में कंकाली माता का मंदिर है
  2. जहां स्थापित मां काली की प्रतिमा की गर्दन 45 डिग्री झुकी है
  3. माता की गर्दन हर साल विजयादशमी के दिन सीधी हो जाती है

धर्म डेस्क, मध्यप्रदेश। भारत में देवी-देवताओं से जुड़े कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे अनेक धार्मिक मान्यताएं और लोककथाएं जुड़ी हुई हैं। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित कंकाली माता मंदिर भी इन्हीं में से एक है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां स्थापित मां काली की मूर्ति की 45 डिग्री झुकी हुई गर्दन दशहरे के दिन एक दिन के लिए सीधी हो जाती है। हालांकि, इस दावे की कोई वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसे श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी मान्यता माना जाता है।

रायसेन के गुदावल गांव में स्थित है मंदिर

कंकाली माता मंदिर रायसेन जिले के गुदावल गांव में स्थित है। इस मंदिर की स्थापना लगभग 1731 के आसपास मानी जाती है। कहा जाता है कि उसी समय खुदाई के दौरान यह प्रतिमा मिली थी। हालांकि, मंदिर के निर्माण काल का कोई प्रमाणित ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।


सपने में मिला था मंदिर का संकेत

मंदिर से जुड़ी एक मान्यता के अनुसार, स्थानीय निवासी हर लाल मेड़ा को सपने में इस स्थान का संकेत मिला था। इसके बाद उन्होंने वहां खुदाई करवाई, जहां से मां काली की प्रतिमा मिली। बाद में उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया। तब से यहां नियमित पूजा-अर्चना होती आ रही है।

मंदिर परिसर का विशाल हॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र है। बताया जाता है कि करीब 10 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बने इस हॉल में कोई स्तंभ (पिलर) नहीं है।

मनोकामना पूरी होने पर बनाते हैं हाथों के निशान

मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि यहां श्रद्धालु मनोकामना मांगकर धागा या बंधन बांधते हैं और इच्छा पूरी होने पर उसे खोलने आते हैं। निसंतान दंपत्तियों से जुड़ी भी एक लोकमान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि महिलाएं मनोकामना मांगते समय उल्टे हाथ से गोबर का निशान बनाती हैं। इच्छा पूरी होने पर सीधे हाथ का निशान बनाकर आभार व्यक्त करती हैं। मंदिर परिसर में ऐसे कई निशान आज भी देखे जा सकते हैं।

दशहरे पर सीधी हो जाती है माता की गर्दन?

सबसे प्रसिद्ध मान्यता यह है कि दशहरे के दिन मां काली की झुकी हुई गर्दन एक दिन के लिए सीधी हो जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जिसे इस रूप के दर्शन हो जाएं, उसके जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं। हालांकि, इस घटना का कोई प्रमाणित वैज्ञानिक या ऐतिहासिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। इसे पूरी तरह धार्मिक आस्था और स्थानीय मान्यताओं का हिस्सा माना जाता है।

नवरात्र और दशहरे के दौरान इस मंदिर में मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

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