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क्या आप राखी पर महंगे गिफ्ट न मिलने पर मायूस होते हैं? द्रौपदी और श्रीकृष्ण के इस प्रसंग से समझें इसका असली मतलब

रक्षाबंधन का पर्व महंगे उपहारों या भौतिक वस्तुओं का नहीं बल्कि निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है। महाभारत में श्रीकृष्ण और द्रौपदी का पावन प्रसंग सिखाता है...और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Thu, 27 Aug 2026 06:56:26 PM (IST)Updated Date: Thu, 27 Aug 2026 06:56:26 PM (IST)
क्या आप राखी पर महंगे गिफ्ट न मिलने पर मायूस होते हैं? द्रौपदी और श्रीकृष्ण के इस प्रसंग से समझें इसका असली मतलब
भगवान श्रीकृष्ण की उंगली पर अपनी साड़ी का पल्लू बांधती द्रौपदी। (AI जनरेटेड)

HighLights

  1. भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी से राखी और सुरक्षा के वचन का आरंभ हुआ
  2. चीरहरण के समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई और इसका मान रखा
  3. महंगे उपहारों के स्थान पर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम तोहफा है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रक्षाबंधन पर यदि बजट कम होने के कारण भाई अपनी बहन को महंगा उपहार न दे पाए, तो क्या यह पावन त्योहार अधूरा रह जाता है? बाजारों में सजी महंगी राखियों और तोहफों के दिखावे के बीच महाभारत की यह पौराणिक घटना हमें सिखाती है कि इस पर्व में भौतिक उपहारों की नहीं, बल्कि भावना और सुरक्षा के संकल्प की कीमत सबसे बड़ी होती है।

द्रौपदी और भगवान श्रीकृष्ण का पावन प्रसंग

पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया था, तब उनकी उंगली कट गई और उससे रक्त बहने लगा। महल में मौजूद रानियां और सेवक पट्टी व दवा खोजने के लिए दौड़े।

तभी वहां मौजूद द्रौपदी ने बिना एक पल गंवाए अपनी कीमती रेशमी साड़ी का पल्लू फाड़ा और भगवान की उंगली पर बांध दिया। द्रौपदी के मन में साड़ी के नुकसान का कोई विचार नहीं था, केवल अपने भाई समान सखा के प्रति निस्वार्थ भाव और चिंता थी।


एक सूत के धागे का कर्ज और रक्षा का वचन

द्रौपदी के इस निस्वार्थ प्रेम को देखकर भगवान श्रीकृष्ण अत्यंत भावुक हुए। उन्होंने कहा कि कपड़े का यह छोटा सा टुकड़ा मेरे लिए अनमोल रक्षासूत्र बन गया है। उन्होंने द्रौपदी को वचन दिया कि इस सूत के धागे का कर्ज वे जीवन भर याद रखेंगे और सही समय आने पर उनकी रक्षा करेंगे।

बाद में, जब हस्तिनापुर की भरी सभा में द्रौपदी का चीरहरण करने का प्रयास किया गया, तब श्रीकृष्ण ने उसी एक कपड़े के टुकड़े का मान रखते हुए साड़ी का विस्तार कर द्रौपदी की लाज बचाई थी।

गिफ्ट की कीमत नहीं, भावनाओं का है महत्व

यह पावन प्रसंग हमें रक्षाबंधन का असली अर्थ समझाता है-

  • निस्वार्थ भाव सबसे ऊपर: द्रौपदी ने कोई कीमती वस्तु नहीं, बल्कि केवल कपड़े का टुकड़ा बांधा था। राखी का असली महत्व उसमें छिपे प्यार और चिंता में होता है।
  • भरोसा ही रक्षासूत्र है: कलाई पर बंधा धागा इस बात का प्रतीक है कि परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, भाई हमेशा बहन के साथ खड़ा रहेगा।
  • दिखावे से बचें: आज के दौर में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण महंगे गिफ्ट्स को प्यार का पैमाना मान लिया जाता है, जो पूरी तरह गलत है।

सच्चा उपहार क्या?

रक्षाबंधन का सबसे बड़ा तोहफा एक-दूसरे के प्रति सम्मान, सुरक्षा का वचन और अटूट प्रेम है। यदि इस रक्षाबंधन आप अपनी बहन को महंगा उपहार नहीं दे पा रहे हैं, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। बहन को अपना समय दें, उसका सम्मान करें और जीवन भर उसका साथ निभाने का सच्चा भरोसा दिलाएं—यही इस त्योहार का सबसे अनमोल उपहार है।

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