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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 07, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

श्रीराम से थी विवाह की चाह, कल्कि अवतार में होगी पूरी!

अब भैरव मां वैष्णों की शक्तियों से परिचित हो चुका था उसने मां से मोक्ष प्राप्ति की मांग की।

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Publish Date: Thu, 07 Jan 2016 12:42:57 PM (IST)Updated Date: Fri, 08 Jan 2016 05:17:43 PM (IST)
श्रीराम से थी विवाह की चाह, कल्कि अवतार में होगी पूरी!

हिंदू धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि जब भगवान श्रीराम, सीता जी को खोजते हुए समुद्र किनारे पहुंचे। तब वहां उन्हें एक कन्या दिखाई दीं। वह गहरे ध्यान में बैठी थीं। श्रीराम के पूछने पर उस कन्या ने अपना नाम वैष्णवी बताया और श्रीराम से कहा कि वो उनसे विवाह करना चाहती हैं। इसलिए यहां तप कर रही हैं।

श्रीराम ने कहा, 'श्रीराम के जन्म में वो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। उनकी एक ही पत्नी हैं और वो हैं सीता।' लेकिन श्रीराम ने उन्हें आश्वासन दिया कि, 'कलियुग में जब वह कल्कि अवतार लेंगे तब उनसे विवाह करेंगे। तब तक वैष्णवी आप उत्तर भारत में स्थित माणिक पहाड़ियों की त्रिकुटा पर्वत श्रंखला की गुफा में निवास करें। यह सुनकर माता वैष्णों प्रसन्न हुईं।'


माता वैष्णों से संबंधित एक और कथा का उल्लेख मिलता है। यह पौराणिक कथा कुछ इस तरह है कि, 'एक बार श्रीधर नाम का मां वैष्णो का भक्त था। वह बहुत ही विनम्र और धर्मपरायण था। श्रीधर कटरा कस्बे के हंसली गांव में रहता था। एक बार उन्हें एक छोटी कन्या ने दर्शन दिए और कहा, 'श्रीधर जी आप मां वैष्णो के नाम का विशाल भंडारे का आयोजन करें।'

श्रीधर ने सारे गांव को भोज पर आमंत्रित किया। लेकिन उनकी कुटिया छोटी होने के कारण वह चिंतित हो गए। लेकिन तभी एक चमत्कार हुआ उनकी कुटिया बाहर से तो देखने में छोटी थी, लेकिन उसमें सारे गांव के लोग बैठकर भोजन करने लगे।

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इस चमत्कार के बारे में भैरव को भी पता चला। भैरव, सिद्धी प्राप्त बड़े तांत्रिक थे। वह श्रीधर की अलौकिक शक्तियों के बारे में सुनकर भोज में पहुंचे। उन्होंने श्रीधर से तामसिक भोजन की मांग की, लेकिन श्रीधर ने उनका यह अनुरोध ठुकरा दिया। तब मां वैष्णो स्वयं कन्या रूप में पहुंची और भैरव के इस व्यवहार से काफी नाराज हुईं। भैरव ने कन्या को पकड़ने की कोशिश की लेकिन वह वहां से चली गईं। भैरव भी उनके पीछे-पीछे जाने लगा।

भैरव ने कन्या का त्रिकुटा पर्वत तक पीछा किया। मां एक गुफा में छिप गईं। वहां, वह 9 माह तक रहीं। जब भैरव ने उन्हें मारने की कोशिश की तो उन्होने भैरव का सिर धड़ से अलग कर दिया।

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अब भैरव मां वैष्णों की शक्तियों से परिचित हो चुका था उसने मां से मोक्ष प्राप्ति की मांग की। मां ने उसे मोक्ष दिया। और कहा, जो भी भक्त मेरे दर्शन के लिए वैष्णो धाम आएगा। उसे पहले भैरव दर्शन करने होंगे नहीं तो उसकी तीर्थयात्रा अधूरी मानी जाएगी।

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